दरभंगा AIIMS विवाद बढता ही जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया के ट्वीट के बाद सियायत तेज हो गई। बिहार सरकार के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को जवाब दिया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया ने तेजस्वी यादव को 44 शब्द में अपना जवाब दिया था। इस ट्वीट पर पलटवार करते हुए मंत्री संजय झा ने 439 शब्द में जवाब दिया और सवाल पूछा कि सिंगापुर, हॉलैंड आदि का काफी बड़ा इलाका समुद्र को भर कर बसाया गया है। मिथिला के लोग हैरान हैं कि जब समुद्र को भर कर शहर बसाया जा सकता है, तब दरभंगा में आठ-दस फीट गहरी जमीन में मिट्टी भर कर एम्स क्यों नहीं बनाया जा सकता है? जबकि उसी इलाके में दरभंगा इंजीनियरिंग कॉलेज फंक्शनल है। बिहार सरकार ने मंत्री संजय झा ने जो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को जो लिखा, वह अमर उजाला आपको जस के तस पढ़ा रहा है...
दरभंगा एम्स के लिए बिहार सरकार ने मुफ्त में जमीन दी
मंत्री संजय झा ने कहा कि आपने ट्वीट के माध्यम से पुन: बताया है कि दरभंगा में बिहार सरकार द्वारा दी गई परती भूमि एम्स निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं है! जरा राजनीति को परे रख कर सोचिएगा, आपकी इस बात पर कौन यकीन करेगा! आप जिस प्रदेश से आते हैं, वहां तो नर्मदा नदी के बीच में टापू पर दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण कराया गया है। देश में ऐसे अनेक उदाहरण मौजूद हैं, जिनमें पहाड़ों, नदियों और अत्यंत दुर्गम स्थलों पर भी विकास की ईमारत खड़ी की गई है। आपके विभाग को यह बताया जा चुका है कि दरभंगा एम्स के लिए बिहार सरकार ने न केवल मुफ्त जमीन दी है, बल्कि उस पर मिट्टी भराई कर उसके समतलीकरण और चहारदीवारी निर्माण के लिए 309.29 करोड़ रुपये खर्च करने की स्वीकृति भी दे दी है। इस कार्य के लिए निविदा भी आमंत्रित की जा चुकी है। आपका विभाग जब उस भूमि पर एम्स निर्माण की सहमति देगा, उसके तत्काल बाद मिट्टी भराई का काम शुरू हो जाएगा।
आप दरभंगा एम्स का निर्माण जल्द-से-जल्द करवा ही दीजिए
मंत्री संजय झा ने आगे लिखा कि शोभन-एकमी बाईपास के किनारे आवंटित उक्त भूमि ईस्ट-वेस्ट कोरिडोर से करीब 3 किमी दूर है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बार-बार कह चुके हैं कि दरभंगा एम्स के लिए दी गई भूमि तक हाईवे से फोरलेन कनेक्टिविटी देने सहित और जो कुछ भी करना होगा, राज्य सरकार अपने संसाधनों से कराएगी। आवंटित भूमि दरभंगा एयरपोर्ट से भी मात्र 15 मिनट की दूरी पर है। इससें दरभंगा एम्स में देश-विदेश के विशेषज्ञ चिकित्सकों का आना-जाना सुगम होगा। साथ ही गंभीर मरीजों को एयर एंबुलेंस के जरिये यहां लाना या यहां से बाहर ले जाना भी संभव होगा। आपको यह भी पता होगा कि बिहार सरकार ने पहली बार जब DMCH की भूमि देने का प्रस्ताव दिया था, तब भी केंद्र से आई टीम ने उसे 'लो लैंड' बताने और उसका कुछ हिस्सा रेलवे लाइन के दूसरी तरफ होने सहित कई खामियां गिनाई थीं। हम सभी जानते हैं कि देश में जो भी नये एम्स बने हैं, वे किसी अस्पताल के परिसर में नहीं, बल्कि ग्रीन फील्ड एरिया में बने हैं। अब जबकि माननीय प्रधानमंत्री जी ने यहां तक कह दिया है कि दरभंगा में एम्स खुल गया है; तो आपसे पुन: अनुरोध है कि मिथिला सहित संपूर्ण बिहार की जनता के भले के लिए आप दरभंगा एम्स का निर्माण जल्द-से-जल्द करवा ही दीजिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा था- 19 सितंबर 2020 को दी थी दरभंगा एम्स की अनुमति
इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने तेजस्वी यादव को जवाब देते हुए कहा था कि मोदी सरकार विकास में राजनीति नहीं करती बल्कि विकास की राजनीति करती है। दरभंगा एम्स की अनुमति मोदी सरकार ने 19 सितंबर 2020 को दी थी और बिहार सरकार ने 3 नवंबर 2021 को पहली जमीन दी।