बिहार में एक बार फिर सियासी भूचाल की आशंका दिखने लगी है। राज्य में धर्म के नाम पर फैली हिंसा के बाद जदयू और भाजपा के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। जदयू जहां भाजपा पर हमलावर हो रहा है, वहीं भाजपा किसी भी हालात में अपने एजेंडे से पीछे हटने को तैयार नहीं है। इधर, नीतीश को लेकर राजद और कांग्रेस के स्वर भी बदल रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारे में एक फिर किसी बड़े बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। राजनीतिक बहसों में भी गठबंधन के भविष्य को लेकर कयास लगाया जाने लगा है।
बृहस्पतिवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में कोर कमेटी की मैराथन बैठक हुई। बैठक बिहार के वर्तमान राजनीतिक हालात पर चर्चा हुई। इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री भूपेंद्र यादव, प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय, सुशील कुमार मोदी समेत कोर कमेटी के लगभग सभी सदस्य मौजूद रहे। बैठक के बाद अध्यक्ष नित्यानंद राय ने मीडिया से बस इतना कहा कि बैठक में संगठन विस्तार को लेकर चर्चा हुई, लेकिन सूत्रों की माने तो बैठक में सुशील मोदी की राय सिरे से खारिज कर दी गई। कोर कमेटी के अधिकतर सदस्य सुशील मोदी की इस राय से सहमत नहीं हुए कि पार्टी हिंदुत्व के एजेंडे को नरम करे। मोदी की सलाह को कोर कमेटी ने राजनैतिक रूप से आत्मघाती बताया।
इधर,
जदयू और भाजपा के बीच बढ़ती तल्खी के बीच कांग्रेस के प्रभारी अध्यक्ष कौकब कादरी ने कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अपना चेहरा है और वो आज भी सेक्यूलर नेता के रूप में जाने जाते हैं। कांग्रेस चाहती है समान विचारधारा के लोग साथ आएं। उन्होंने कहा कि नीतिगत फैसला जदयू को लेना है। नीतीश अपना फैसला लें कि उन्हें आगे क्या करना है। कांग्रेस के बाद राजद ने भी नीतीश के प्रति नरमी दिखाई है। राजद एमएलसी संजय प्रसाद ने कहा है कि नीतीश कुमार पहले भाजपा से अलग होने का फैसला लें। भाजपा के साथ रहे तो नीतीश पर भी सांप्रदायिकता का रंग चढ़ जाएगा।