इसके अलावा बरगामो के रिकार्डो बेलोफिओर 'इज देयर लाइफ ऑफ मार्कस' पर लेक्चर देंगे। बता दें कि बेलोफिओर समकालीन पूंजीवादी अर्थव्यवस्था और दार्शनिक अर्थशास्त्र की रिसर्च में रुचि रखते हैं। वहीं कोलंबिया विश्वविद्यालय की साहित्यक विचारक गायत्री चक्रवर्ती ' आज हम मार्क्सवाद का इस्तेमाल कैसे करें' विषय पर लेक्चर देंगी। इनके अलावा मिगुइल वेदा, जन तपोरोवस्की, पीटर ह्यूडिस और स्पेनसर लिओनार्ड जैसे सामाजिक वैज्ञानिक भी भाषण देंगे।
बिहार ही क्यों?
जब ADRI के सदस्य सचिव शैवाल गुप्ता से पूछा गया कि उन्होंने इस कार्यक्रम के लिए बिहार को ही क्यों चुना तो उन्होंने बताया कि कुछ अन्य क्षेत्रों की तरह ही बिहार का कार्ल मार्क्स से कोई विशिष्ट जुड़ाव नहीं है। लेकिन मार्क्सवाद के सिद्धांत और उन पर अमल की बात करें तो यह बात बिहार में सच साबित होती है।
उन्होंने कहा कि बिहार की विधानसभा में वामपंथी संगठन के 3 सदस्य हैं। वहीं सात वाम दलों ने 2015 चुनावों में कुल वोटों का तीन फीसदी हासिल किया था। उन्होंने कहा कि जाति पर आधारित मंडल कमीशन की रिपोर्ट जो 1990 में लागू हुई थी के बाद भी बिहार के दक्षिण-पश्चिम बिहार और केंद्रीय बिहार में वाम दलों का बोलबाला है।