माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर राजनीतिक दलों से विचार विमर्श किए बिना चुनाव प्रक्रिया में बदलाव करने पर विरोध जताया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह जल्दबाजी बिहार विधानसभा चुनावाें के कारण है?
येचुरी ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स से पता चल रहा है कि अब 64 वर्ष से अधिक के लोगों को पोस्टल बैलट की सुविधा मिलेगी। निर्वाचन आयोग ने इसके लिए किसी राजनीतिक दल से चर्चा की है क्या? ऐसी जानकारी तो नहीं।
उन्होंने पूछा क्या निर्वाचन आयोग दलों से चर्चा करने की व्यवस्था को खत्म कर सभी फैसले मनमाने ढंग से लेना चाहता है? गौरतलब है कि बुजुर्ग मतदाताओं को संक्रमण की चपेट में आने के खतरे को देखते हुए आयोग ने पोस्ट बैलेट के लिए आयुसीमा को 80 से घटाकर 65 करने का फैसला लिया है।
येचुरी ने कहा, संविधान के तहत भी अनुच्छेद 324 में निर्वाचन आयोग को सख्त निर्देश हैं कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह के परिवर्तन से पहले राजनीतिक दलों से विचार विमर्श करना होगा, वह अकेले कोई फैसला नहीं कर सकता। लेकिन इस बार आयोग ने बिना किसी सूचना और सलाह के यह फैसला लिया है।