बिहार के मुजफ्फरपुर जिले और इसके नजदीक के क्षेत्रों में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इंसेफलाइटिस (जेई) से सोमवार को 14 बच्चों की मौत हो गई। इस बीमारी को दिमागी बुखार (चमकी बुखार) कहा जाता है। पिछले एक हफ्ते में इस बीमारी की चपेट में आकर करीब 45 मासूमों की जान जा चुकी है। मुजफ्फरपुर के श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) में इस बुखार से पीड़ित 100 से ज्यादा बच्चे भर्ती हैं।
एसकेएमसीएच की दोनों पीआईसीयू यूनिट में इस बीमारी से पीड़ित बच्चे भरे हुए हैं। पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है जिसके मद्देनजर अस्पताल प्रशासन तीसरी यूनिट खोलने की तैयारी में है। बुखार की चपेट में आए गंभीर मरीजों को भीड़ की वजह से पंक्ति में लगकर ही पीआईसीयू में भर्ती होना पड़ रहा है। एसकेएमसीएच में रविवार को 25 बच्चे भर्ती किए गए, उनमें 4 की मौत हो गई। डॉक्टरों ने बताया कि चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों की उम्र 5-15 साल के बीच है।
नीतीश ने मौत पर चिंता जताई
दिमागी बुखार (चमकी बुखार) से हर साल इसी मौसम में मुजफ्फरपुर और इसके आसपास के इलाकों के बच्चे बीमार पड़ जाते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक उत्तरी बिहार के चार जिले मोतिहारी, सीतामढी, वैशाली और शिवहर में चमकी बुखार ज्यादा फैली है। पटना में सोमवार को लोक संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि चमकी बुखार से बच्चों की मौत पर सरकार गंभीर है। उन्होंने कहा कि सभी डॉक्टर अलर्ट पर हैं और मुख्य सचिव स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
क्या है चमकी बुखार के लक्षण
यह बुखार तेज गर्मी और हवा में ज्यादा नमी के कारण होता है। एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इंसेफलाइटिस (जेई) से पीड़ित बच्चों को पहले तेज बुखार चढ़ता है और फिर शरीर में ऐंठन होती है। इसके बाद बच्चे बेहोश हो जाते हैं। एसकेएमसीएच के शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. गोपाल साहनी ने बताया कि अगर बच्चों में ऐसे लक्षण पाए जाते हैं तो परिजन बच्चों को तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन एसपी सिंह ने बताया कि बच्चों की मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकांश बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी अचानक शुगर की कमी की पुष्टि हो रही है। उन्होंने भी माना कई बच्चों को तेज बुखार में लाया जा रहा है। उन्होंने इसे चमकी बुखार बताया।
2012 में गई थी 120 बच्चों की जान
एसकेएमसीएच हॉस्पिटल से मिले आकड़ों के मुताबिक 2012 में इस बीमारी से 120 बच्चों की मौत हुई थी।
| साल |
भर्ती |
मौत |
| 2010 |
59 |
24 |
| 2011 |
121 |
00 |
| 2012 |
336 |
120 |
| 2013 |
124 |
39 |
| 2014 |
701 |
90 |
| 2015 |
75 |
11 |
| 2016 |
31 |
04 |
| 2017 |
17 |
11 |
| 2018 |
14 |
07 |
| 2019 |
19 |
50 |