भोपाल के पास बसे सरोतीपुरा गांव में बुनियादी सुविधाओं का आभाव है। बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए गांव तरस रहा है। स्थिति इतनी खराब है कि गांववासियों के पास पीने का पानी तक नहीं है। 2017 में भोपाल को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया था। जबकि सरोतीपुरा में लोग आज भी खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
गांव में करीब 500 लोग रहते हैं। जो बुनियादी सुविधाओं के आभाव में अपने जीवन से लड़ रहे हैं। आलम यह है कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गांववासियों को दो किलोमीटर पैदल चल कर जाना पड़ता है, और अगर मरीज चलने की हालत में ना हो तो उसे चारपाई पर अस्पताल ले जाने के आलावा कोई चारा नहीं बचता। क्योंकि गांव में सड़क भी नहीं है।
राज्य में चल रहे "आपका प्रशासन, आपके द्वार" प्रोग्राम के तहत जिला अधिकारियों की टीम ने गुरुवार को गांव पहुंच कर लोगों की सुध ली। जिला पंचायत निरीक्षक दिलीप शिंदे का कहना है कि गांव में प्रमुख समस्या यह है कि यहां पर सड़कें नहीं है। कुछ लोग ऐसे भी है जिन्हें पेंशन मिलनी चाहिए पर नहीं मिल रही है। मैंने अपने सचिव को इस मामले में जल्द कारवाई के निर्देश दिए हैं।