लड़कियों के प्रति बढ़ते अपराधों ने मुझे ताइक्वांडो चैम्पियन बनाया। अब अधिक से अधिक लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाना ही मेरा लक्ष्य है। यह कहना है ताइक्वांडो की खिलाड़ी और चंडीगढ़ की पहली महिला सर्टिफाइड कोच संगीता का। इन्हें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (एनआईएस) की ओर से किए गए कोर्स में अव्वल आने के बाद ए ग्रेड का सर्टिफिकेट मिला है।
औरंगाबाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स की ओर से टेस्ट लिया गया था। जिसमें ऑल इंडिया से 50 से अधिक कोचों ने हिस्सा लिया। यहां 45 दिन के लिए विभिन्न गतिविधियां कराई गईं थीं। जिसमें कोचों की प्रतिभा को गहनता से जांचा गया। टेस्ट में फिजिकल और लिखित रूप से परीक्षा भी हुई। जिसमें संगीता ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 75 प्र्रतिशत मॉर्क्स हासिल करने के साथ ही ए ग्रेड भी हासिल किया। इसके साथ ही वह शहर की पहली महिला सर्टिफाइड कोच बन गईं।
कबड्डी से ताइक्वांडो तक का सफर
बातचीत में संगीता ने बताया कि शुरू में वह नेशनल लेवल की कबड्डी खिलाड़ी रहीं। 20 से अधिक बार वह नेशनल में कबड्डी प्रतियोगिता खेली चुकी हैं। लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए संगीता ने सेल्फ डिफेंस से जुड़े खेल ताइक्वांडो में आने की ठानी। आज वह कई युवा छात्राओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देने में जुटी हैं।
कोचिंग के साथ परिवार का खर्च उठा रही हैं
मौजूदा समय में संगीता एक प्राइवेट स्कूल में पीटी टीचर हैं। शाम को छात्राओं को ताइक्वांडो की क्लास लेती हैं। परिवार सेक्टर-56 में रहता है। पिता सरकारी नौकरी से रिटायर हो चुके हैं और मां हाउस वाइफ है। छोटा भाई जिसकी पढ़ाई का खर्च वह स्वयं उठा रही हैं। संगीता खुद ताइक्वांडो में चार बार नेशनल गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। अब कोच की भूमिका निभाते हुए अपनी 3 खिलाड़ियों को नेशनल चैंपियनशिप में मेडल दिला चुकी हैं। संगीता ने कहा कि वह स्पोर्ट्स फील्ड में जॉब चाहती हैं। ताकि अपने परिवार का खर्च उठा सकें और हुनर युवा बेटियों में बांट सकें।