क्रिकेट जैसे खेल पर सिर्फ लड़कों का अधिकार बताने वालों को साक्षी यादव की ओर देखना चाहिए। लड़कियों के क्रिकेट खेलने के प्रति संकीर्ण सोच रखने वाले आसपास के लोगों ने उनके करियर को लेकर खूब ताने कसे, लेकिन डाइवर की यह बेटी अपने बुलंद इरादे के साथ आगे बढ़ रही है।
साक्षी अंडर-19 रणजी मैच भी खेल चुकी है। हाल ही में जिला क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से शहर के बेस्ट 15 क्रिकेटरों को सम्मानित किया गया था, जिसमें आईपीएल खेल चुके मोहित शर्मा व अन्य रणजी क्रिकेटरों के साथ साक्षी भी सम्मानित हुई थीं।
सराय ख्वाजा गांव की रहने वाली 19 वर्षीय साक्षी क्रिकेट में अपना हुनर दिखाने को बेताब है। वह कहती है कि यदि उन्हें आगे खेलने का मौका मिला तो वह देश व प्रदेश का नाम रोशन कर सकती है।
साक्षी ने 2015 अंडर-19 के रणजी मैच में हरियाणा टीम में बतौर विकेट कीपर हिस्सा लिया था। दिल्ली के गार्गी कॉलेज में बीए की छात्रा साक्षी दिल्ली यूनिवर्सिटी क्रिकेट टीम में शामिल है।
हाल ही में झांसी में हुए इंटर यूनिवर्सिटी क्रिकेट टूर्नामेंट में साक्षी ने तीन विकेट लेकर अपनी टीम को चौथा स्थान दिलाया था।
पापा का मिला सहयोग
साक्षी अपनी कामियाबी का श्रेय अपने पापा महेंद्र सिंह यादव को देती है। उन्होंनें बताया कि जब वह सराय ख्वाजा के सरकारी स्कूल में आठवीं कक्षा में पढ़ती थी, तो स्कूल में क्रिकेट का एक ट्रायल हुआ। जिसमें वह चयनित हो गई।
क्रिकेट की ड्रेस पहनकर जब वह कोचिंग के लिए जाती, तो गांव वाले खूब ताने कसते। कई बार पड़ोसियों ने उनके पापा-मम्मी से यह तक कह दिया कि क्रिकेट लड़कियों का खेल नहीं है, यह खेल लड़के खेलते हैं। लेकिन पापा ने हमेशा बढ़ावा दिया।