क्यों बदला गया नियमों का तरीका
ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, गलत दिशा में वाहन चलाने के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। वर्ष 2025 में ऐसे मामलों की संख्या तीन लाख से अधिक दर्ज की गई, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। पुलिस का मानना है कि केवल जुर्माना अब असरदार नहीं रह गया है, क्योंकि कई लोग जाम से बचने या समय बचाने के लिए जानबूझकर गलत लेन का इस्तेमाल करते हैं। इसी वजह से अब गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज करने का फैसला लिया गया है।
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हाल के मामलों से मिला सख्त संदेश
जनवरी की शुरुआत में दिल्ली कैंट और कपासेड़ा इलाकों में गलत दिशा में तेज रफ्तार से वाहन चलाने के दो मामलों में एफआईआर दर्ज की गई। एक मामले में ट्रैफिक ड्यूटी पर तैनात अधिकारी ने बताया कि गलत दिशा से आ रहे वाहन की वजह से सड़क पर अफरा-तफरी मच गई और कई लोगों को परेशानी हुई। पुलिस के पहुंचने पर चालक न तो लाइसेंस दिखा सका और न ही बीमा से जुड़े दस्तावेज। दूसरे मामले में आरोपी ने खुद स्वीकार किया कि वह ट्रैफिक जाम से बचने के लिए लापरवाही से गलत दिशा में वाहन चला रहा था।
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अब क्या होगा सजा का प्रावधान
अब तक गलत दिशा में वाहन चलाने पर अधिकतर मामलों में पांच हजार रुपये का चालान काटा जाता था। लेकिन नई व्यवस्था के तहत यदि मामला गंभीर पाया गया तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 281 के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। इस धारा के तहत छह महीने तक की जेल, एक हजार रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसके साथ ही संबंधित वाहन को जब्त भी किया जाएगा। हालांकि यह अपराध जमानती है, लेकिन पुलिस का मानना है कि कानूनी प्रक्रिया का डर लोगों को नियम तोड़ने से रोकेगा।
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हर मामले में नहीं होगी एफआईआर
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने साफ किया है कि हर ट्रैफिक उल्लंघन पर एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। यह कदम उन मामलों के लिए है, जहां गलत दिशा में ड्राइविंग से सार्वजनिक सुरक्षा को सीधा खतरा हो। पुलिस को उम्मीद है कि सख्त कार्रवाई की संभावना से लोग जाम से बचने या कुछ मिनट बचाने के लिए गलत लेन लेने से पहले दो बार सोचेंगे। सड़क पर अनुशासन बढ़ाने और हादसों को कम करने की दिशा में इसे एक अहम कदम माना जा रहा है।
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