दुनिया के कई बड़े शहरों में ट्रैफिक की हालत बहुत खराब हो गई है। इसकी वजह है तेजी से बढ़ती आबादी, निजी गाड़ियों की संख्या बढ़ना और शहरों के बीचों-बीच ही ज्यादातर काम-काज का होना। कई जगहों पर रोज़ की यात्रा का समय बहुत ज्यादा बढ़ गया है। पीक टाइम में गाड़ियों की रफ्तार इतनी कम हो जाती है कि कभी-कभी पैदल चलना या साइकिल चलाना भी तेज़ लगता है। ऐसे शहरों में लोग साल में 100 से 200 घंटे तक ट्रैफिक में फंसे रहते हैं, जिससे उनका काम, मानसिक तनाव और जीवन की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। अब यह समस्या सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मंझोले शहर भी इससे जूझने लगे हैं। इस लेख में हम कुछ ऐसे शहर बताएंगे जहां ट्रैफिक की परेशानी सबसे ज्यादा है:
यहां ट्रैफिक जाम बहुत आम है। ज्यादा आबादी और लंबी दूरी की यात्रा इसकी बड़ी वजह है। शहर पहाड़ों से घिरा है, इसलिए सड़कों को बढ़ाना मुश्किल है। मेट्रो और बसें मौजूद हैं, लेकिन भीड़ और आखिरी छोर तक सही कनेक्टिविटी न होने से लोग निजी गाड़ियों पर निर्भर रहते हैं।
2. बंगलूरू
बंगलूरू में ट्रैफिक का मुख्य कारण तेजी से बढ़ता विकास है। टेक्नोलॉजी हब होने के कारण यहां हर साल बहुत लोग नौकरी के लिए आते हैं। सड़कें इतनी गाड़ियों का दबाव नहीं झेल पा रहीं। संकरी सड़कें, लगातार निर्माण और गाड़ियों की भरमार से औसत रफ्तार 17 किमी/घंटा से भी कम हो गई है। मेट्रो बन रही है, लेकिन अभी नेटवर्क पूरा नहीं है।
3. डबलिन
डबलिन छोटा शहर है, फिर भी यहां जाम बड़े शहरों जैसा है। इसकी सड़कें पुरानी हैं और जगह कम है। शहर के बाहर पब्लिक ट्रांसपोर्ट कमजोर है, इसलिए लोग कार से यात्रा करते हैं। यहां लोग साल में करीब 200 घंटे जाम में बर्बाद कर देते हैं।
4. लॉड्ज (पोलैंड)
यह शहर सड़क निर्माण और कारों की ज्यादा संख्या के कारण ट्रैफिक झेल रहा है। यहां कुछ जगहों पर रफ्तार ठीक है, लेकिन निर्माण कार्य और बाईपास की कमी से परेशानी बढ़ जाती है। शहर सुधार की कोशिश कर रहा है, पर फिलहाल ट्रैफिक पर इसका असर नकारात्मक दिख रहा है।
5. पुणे
पुणे शिक्षा और आईटी हब के रूप में तेजी से बढ़ा है। दूरी कम होने के बावजूद आबादी और गाड़ियों की संख्या बढ़ने से ट्रैफिक बढ़ गया है। लोग साल में 150 घंटे से ज्यादा समय जाम में गंवा देते हैं। मेट्रो बन रही है, लेकिन पूरी तरह शुरू होने तक समस्या बनी रहेगी।
6. ल्यूब्लिन
यहां ट्रैफिक जाम पुरानी समस्या नहीं है, बल्कि अब धीरे-धीरे बढ़ रही है। गाड़ियों की संख्या बढ़ रही है और शहर फैल रहा है, इसलिए देरी बढ़ती जा रही है। यह दिखाता है कि समय रहते कदम न उठाए जाएं तो आगे स्थिति गंभीर हो सकती है।
7. बोगोटा
यहां दुनिया के बड़े बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम में से एक है, फिर भी ट्रैफिक बहुत खराब है। आबादी बढ़ रही है, मेट्रो की पहुंच सीमित है और भूगोल भी मुश्किल है। इसलिए जाम की समस्या लगातार बनी रहती है।
8. अरेक्विपा
शहर के बढ़ने के साथ यहां ट्रैफिक भी बढ़ रहा है। सड़क नेटवर्क सीमित है और निजी गाड़ियों का इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है। यह बताता है कि अब मंझोले शहर भी बड़े शहरों जैसी ट्रैफिक समस्या झेलने लगे हैं।
9. लीमा
लीमा को दक्षिण अमेरिका में सबसे खराब ट्रैफिक जाम वाले शहरों में गिना जाता है। यहां लोग साल में करीब 200 घंटे जाम में फंसकर गंवा देते हैं। गाड़ियों पर ज्यादा निर्भरता से रफ्तार कम होती है और प्रदूषण भी बढ़ता है। शहर को यातायात सुधार के लिए बड़े बदलाव की जरूरत है।
10. बैंकॉक
बैंकॉक का ट्रैफिक पूरी दुनिया में बदनाम है। कुछ जगह सुधार हुआ है, लेकिन गाड़ियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि जाम लगना तय है। रेल नेटवर्क बढ़ रहा है, फिर भी कारों का दबदबा बना हुआ है।