इंडियन ऑटो एलपीजी गठबंधन (IAC) ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) से कहा है कि भारत के एनर्जी ट्रांजिशन पर चल रहे एक बड़े अध्ययन में ऑटो एलपीजी को भी शामिल किया जाए। यह अध्ययन टेरी (TERI) के नेतृत्व में हो रहा है, जिसका उद्देश्य यह देखना है कि भारत में वाहनों के लिए कौन-कौन से स्वच्छ ईंधन विकल्प बेहतर हो सकते हैं।
क्या होता है ऑटो एलपीजी?
ऑटो एलपीजी को ऑटोगैस भी कहा जाता है। ये मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का एक मिश्रण है। इसका इस्तेमाल पेट्रोल के स्वच्छ और सस्ते विकल्प के रूप में वाहनों में किया जाता है। यह एक पर्यावरण के अनुकूल ईंधन है जो पेट्रोल या डीजल की तुलना में कम प्रदूषण फैलाता है और इंजन की उम्र बढ़ाने में मदद करता है।
ऑटो एलपीजी की मुख्य विशेषताएं
यह कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक कणों का कम उत्सर्जन करता है। यह पेट्रोल की तुलना में काफी सस्ता पड़ता है, जिससे ईंधन लागत में लगभग 35-40% की बचत हो सकती है। इसकी ऑक्टेन संख्या अधिक (88 के आसपास) होती है, जो बेहतर इंजन प्रदर्शन सुनिश्चित करती है। ऑटो एलपीजी टैंक पारंपरिक ईंधन टैंकों की तुलना में 20 गुना अधिक पंचर-प्रतिरोधी होते हैं। भारत में ऑटो एलपीजी का उपयोग, विशेष रूप से निर्मित ऑटो एलपीजी डिस्पेंसिंग स्टेशनों (ALDS) के माध्यम से, पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के जरिए विनियमित और वैध है।
IAC को क्यों है चिंता?
PNGRB ने यह अध्ययन इसलिए शुरू किया है ताकि सरकार और नीति बनाने वालों को परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन घटाने, हवा की गुणवत्ता सुधारने और टिकाऊ परिवहन पर सही और तथ्य-आधारित जानकारी मिल सके। लेकिन IAC का कहना है कि अगर इसमें ऑटो एलपीजी को नहीं जोड़ा गया तो अध्ययन अधूरा और एकतरफा हो सकता है। गठबंधन के मुताबिक, ऑटो एलपीजी एक ऐसा ईंधन है जो अभी उपलब्ध है, पहले से इस्तेमाल हो रहा है और ट्रांजिशन फ्यूल के तौर पर मदद कर सकता है।
ऑटो एलपीजी की खास बातें
IAC ने बताया कि दुनिया भर में करीब 80,000 फ्यूल स्टेशनों के जरिए 3 करोड़ से ज्यादा वाहन ऑटो एलपीजी पर चलते हैं। भारत में भी लाखों वाहन इसका इस्तेमाल करते हैं और देश में करीब 2,500 ऑटो एलपीजी डिस्पेंसिंग आउटलेट्स मौजूद हैं। गठबंधन का दावा है कि ऑटो एलपीजी से शहरों में प्रदूषण कम होता है, PM (धूल-कण) और NOx जैसे हानिकारक प्रदूषक घटते हैं। इसके अलावा ईवी या हाइड्रोजन की तरह नया बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर तुरंत बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। साथ ही यह किफायती भी है।
IAC के महानिदेशक ने क्या कहा?
IAC के महानिदेशक सुयश गुप्ता ने कहा कि PNGRB-TERI का यह अध्ययन टेक्नोलॉजी-तटस्थ होना चाहिए। यानी किसी एक तकनीक को ज्यादा बढ़ावा देने की बजाय सभी विकल्पों का समान तरीके से मूल्यांकन होना चाहिए। उनका कहना है कि ऑटो एलपीजी को शामिल करके लागत, उत्सर्जन, सुरक्षा और आम लोगों की क्षमता जैसे पहलुओं पर सही तुलना हो सकेगी।
PNGRB से IAC की 3 मुख्य मांगें
IAC ने PNGRB से कहा है कि:
- अध्ययन में ऑटो एलपीजी को एक विकल्प के तौर पर साफ तौर पर शामिल किया जाए।
- गठबंधन को हितधारक बनाकर चर्चा में शामिल किया जाए।
- सभी ईंधनों के लिए एक जैसे नियम और मानदंड रखकर तुलना की जाए।
सहयोग की पेशकश भी की
IAC ने TERI और PNGRB को यह भी कहा है कि वे ऑटो एलपीजी से जुड़ा डाटा, अंतरराष्ट्रीय उदाहरण और सुरक्षा मानक साझा करने के लिए तैयार हैं। गठबंधन का मानना है कि ऑटो एलपीजी को शामिल करने से शहरी प्रदूषण घटाने और सस्ती व साफ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।