जहां एक तरफ देश में ईवी की डिमांड बढ़ती जा रही है, सरकार लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है, वहीं नोएडा और इंदौर जैसी घटनाओं ने एक बार फिर लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह वाकई सुरक्षित है? क्या इसे हमें लेना चाहिए? घटनाएं सामने आने के बाद ऐसे ही तमाम सवाल उठने लगते हैं।
Noida EV Fire: पहले जानें पूरा मामला
कल नोएडा के मामुरा स्थित एक पांच मंजिला घर में इलेक्ट्रिक वाहन को चार्जिंग पर लगाया गया था, जिसमें अचानक आग लग गई और दो लोगों की मृत्यु हो गई। हादसा इतना भीषण था कि आस-पास के लगभग 50 परिवारों को सुरक्षा के लिहाज से अपने घरों को छोड़कर भागना पड़ा। पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, चार्जिंग के दौरान ईवी की बैटरी में शॉर्ट-सर्किट या खराबी के कारण चिंगारियां उठीं। ये चिंगारियां पास में ही खड़े पेट्रोल से चलने वाले टू-व्हीलर्स तक पहुंच गईं। पेट्रोल के संपर्क में आते ही आग ने तुरंत विकराल रूप ले लिया, जिसने पूरे इलाके में तबाही मचा दी। ऐसे में सवाल है आखिर इलेक्ट्रिक वाहनों में अचानक आग क्यों लग जाती है? क्या है थर्मल रनअवे का खतरनाक चेन रिएक्शन पानी से बुझाना भी नामुमकिन हो जाता है? आइए समझते हैं इसके बारे में विस्तार से...
बैटरी में आग क्यों लगती है?
- एक्सपर्ट्स के अनुसार, भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों में आग लगने की सबसे बड़ी वजह थर्मल रनअवे (Thermal Runaway) होती है।
- यह ऐसी स्थिति होती है, जब बैटरी के अंदर मौजूद एक सेल अत्यधिक गर्म हो जाता है। इसके बाद यह गर्मी आसपास के दूसरे सेल्स तक पहुंचती है और धीरे-धीरे पूरी बैटरी में चेन रिएक्शन शुरू हो जाता है।
- इस चेन रिएक्शन की वजह से बैटरी के अंदर अत्यधिक गर्मी, ज्वलनशील इलेक्ट्रोलाइट्स और कई प्रकार की खतरनाक गैसें एक साथ बाहर निकलती हैं। जिससे आग तेजी से फैल सकती है।
पानी से बुझाना क्यों हो जाता है मुश्किल?
थर्मल रनअवे के दौरान बैटरी अंदर से लगातार गर्मी पैदा करती रहती है। यही वजह है कि जब सिर्फ पानी डालते हैं तो आग पूरी तरह नहीं बुझती और कई बार कुछ समय बाद दोबारा भी भड़क सकती है।
भारत में बैटरियों में आग लगने के पांच मुख्य कारण
एक्सपर्ट्स ने भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से ईवी बैटरियों में आग लगने के कुछ प्रमुख कारणों यह भी हो सकते हैं..
- भारतीय मौसम के अनुकूल न होना: कई बैटरी पैक्स का डिजाइन भारत की अत्यधिक और भीषण गर्मी को झेलने के लिए तैयार नहीं किया जाता।
- खराब थर्मल मैनेजमेंट: बैटरी से निकलने वाली गर्मी को बाहर फेंकने के लिए वाहनों में पर्याप्त और बेहतर कूलिंग या थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम का न होना।
- घटिया क्वालिटी की बैटरियां: लागत कम करने के लिए मार्केट में सस्ती, नकली या बेहद खराब क्वालिटी की बैटरियों का धड़ल्ले से इस्तेमाल हाेता है, जो ऐसी हादसों का कारण होता है।
- गलत चार्जर का उपयोग: गलत रेटिंग वाले, लोकल या खराब मेंटेनेंस वाले चार्जर और सॉकेट्स का इस्तेमाल करना। अक्सर लोग बिना सोचे समझें सस्ते के चक्कर में लोकर चार्जर ले लेते हैं, जो बाद में खतरनाक साबित होता है।
- बाहरी बदलाव: अधिकृत सर्विस सेंटर के बजाय लोकल मैकेनिकों से अनधिकृत रिपेयरिंग कराना या गाड़ी में आफ्टरमार्केट मॉडिफिकेशन करवाना।
सुरक्षा मानकों में सुधार, लेकिन चुनौती अभी भी बाकी
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए AIS-156 जैसे सुरक्षा मानकों को पहले की तुलना में मजबूत किया गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे बड़ी चुनौती इन नियमों का प्रभावी पालन, असंगठित निर्माताओं, लोकल रिपेयर सेंटर और खराब सर्विसिंग से जुड़ी है।
सुरक्षित रहने के लिए क्या करें?
अगर आपके पास भी एक इलेक्ट्रिक वाहन है, तो इन बातों की गांठ बांध लें...
- हमेशा ब्रांडेड चार्जर चुनें: केवल वाहन निर्माता कंपनी की ओर से प्रमाणित और अप्रूव्ड चार्जर का ही इस्तेमाल करें।
- लोकल रिपेयरिंग को कहें ना: किसी भी तरह की खराबी होने पर केवल अधिकृत डीलर या सर्विस सेंटर पर ही जाएं, लोकल मैकेनिक से छेड़छाड़ न करवाएं।
- सही जगह चार्जिंग: वाहन को हमेशा एक हवादार जगह पर ही चार्ज करें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि आपका इलेक्ट्रिकल सर्किट और वायरिंग सही लोड झेलने के लायक हो।
इन पांच चेतावनी को कभी न करें नजरअंदाज
अगर चार्जिंग के समय या गाड़ी चलाते वक्त आपकों इनमें से कोई भी संकेत दिखे, तो उन्हें खतरे की घंटी समझकर तुरंंत सतर्क हो जाइए।
- बैटरी या वाहन का सामान्य से बहुत ज्यादा गर्म होना।
- बैटरी पैक के हिस्से में किसी भी तरह की सूजन (Swelling) दिखाई देना।
- गाड़ी के पास से कुछ जलने की या अजीब सी केमिकल जैसी बदबू आना।
- वाहन या बैटरी बॉक्स से किसी भी प्रकार का धुआं निकलता दिखना।
- बार-बार चार्जिंग का फेल होना या प्लग इन करने पर एरर आना।