दूसरी तरफ, इलेक्ट्रिक कार पेट्रोल और डीजल कार के मुकाबले काफी महंगी पड़ती है। सााथ ही इलेक्ट्रिक कार को चार्ज करने की भी परेशानी देखने को मिल रही है। हालांकि, इलेक्ट्रिक कार के टायरों को लेकर भी समस्या आ रही है, जी हां, यह एक हैरानी वाली बात है, मगर यह दिक्कत लगातार बढ़ रही है।
इलेक्ट्रिक कार के टायरों को बहुत ही कम समय में बदलना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल है कि क्या इलेक्ट्रिक कारों में घटिया गुणवत्ता वाले टायर लगाएं जा रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इलेक्ट्रिक कार के टायर पेट्रोल और डीजल कार की तुलना में जल्दी घिस जाते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर पेट्रोल कार का टायर 40 हजार किलोमीटर चलने के बाद घिसता है तो इलेक्ट्रिक कार का टायर सिर्फ 30 हजार किलोमीटर चलने के बाद ही घिस जाता है। आइए जानते है कि क्या है इसके पीछे की वजह।
अगर आप सोच रहे हैं कि इलेक्ट्रिक कारों में वाहन कंपनियां घटिया गुणवत्ता का टायर लगाती है, जिसकी वजह से टायर बहुत जल्दी घिस जाते हैं या फिर खराब हो जाते हैं तो आप गलत सोच रहे हैं। दरअसल, इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली कंपनियां इलेक्ट्रिक कारों में अच्छी गुणवत्ता के ही टायर लगाती हैं, मगर इलेक्ट्रिक कार का वजन इतना ज्यादा होता है कि इनके टायर काफी जल्दी घिस जाते हैं। इलेक्ट्रिक कार में ज्यादा वजन का कारण लिथियम बैटरी होता है, जी हां, बैटरी के साथ कई अन्य उपकरण होते हैं, जिनकी वजह से कार का वजन ज्यादा हो जाता है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक कारों में मोटर भी लगी होती है, जिसकी वजह से टायर जल्दी घिस जाते हैं। मगर पेट्रोल या फिर डीजल कारों में ऐसा नहीं होता है।