2025 तक भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तेजी से बढ़ी। मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी (एमएनआरई) के अनुसार, बड़े हाइड्रो को छोड़कर देश की नवीकरणीय क्षमता 180 जीडब्ल्यू से ज्यादा हो गई, जबकि बड़े हाइड्रो और न्यूक्लियर को मिलाकर नॉन-फॉसिल क्षमता 200 जीडब्ल्यू के पार पहुंच गई। ये भारत को 2030 तक 500 जीडब्ल्यू नॉन-फॉसिल एनर्जी लक्ष्य की दिशा में मजबूती से आगे ले जा रहा है।
इस दौरान सोलर और विंड पावर की बढ़ोत्तरी में भी नई चुनौतियां आई। बिजली उत्पादन में बदलाव (वैरिएबिलिटी) बढ़ने से पीक और नॉन-पीक घंटों में ग्रिड पर दबाव बढ़ा। एमएनआरई और पावर मिनिस्ट्री ने माना कि अब फोकस केवल नई क्षमता जोड़ने का नहीं, बल्कि उस बिजली को सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से सिस्टम में जोड़ने का है।
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2025 में क्या-क्या हुआ?
2025 में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम को भविष्य की जरूरत से आगे बढ़ाकर कोर एनाबलर माना गया। सरकार ने बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग और नीतिगत समर्थन लागू किया। बैटरियां पीक डिमांड संभालने, सोलर-विंड की अस्थिरता को संतुलित करने और थर्मल पावर पर निर्भरता घटाने में अहम भूमिका निभाने लगीं। फिर बैटरियों के साथ-साथ 2025 में पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स पर भी फोकस किया गया और जहां पंप्ड स्टोरेज को लंबे समय के समाधान के रूप में देखा गया। वहीं, बैटरियां शॉर्ट और मीडियम टर्म जरूरतों के लिए तेजी से तैनात की जाने वाल लचीली तकनीक बनी। नीति अब मिक्स्ड स्टोरेज रणनीति की ओर बढ़ी।
एमएनआरई ने बैटरी स्टोरेज को भारत की क्लीन एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग रणनीति से जोड़ा। लोकल मैन्युफैक्चरिंग, क्रिटिकल मिनरल्स, रिसाइक्लिंग और नई बैटरी टेक्नोलॉजी पर जोर दिया गया, जिससे आयात निर्भरता कम हो और लंबे समय में लागत स्थिर बनी रहे।
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कैसे दिया बढ़ावा?
इसके लिए कई योजनाएं शुरू की गई। पीएम सूर्य घर जैसी। जिसमें मुफ्त बिजली योजना के जरिए रूफटॉप सोलर को बढ़ावा दिया गया। इसके साथ घरेलू और कम्युनिटी-लेवल बैटरियों की भूमिका को भी स्वीकार किया गया, जिससे ग्रिड पर दबाव कम होगा और बिजली सप्लाई ज्यादा भरोसेमंद बनेगी।
2025 में MNRE का दृष्टिकोण साफ हुआ। उसके अनुसार अब केवल मेगावाट जोड़ना काफी नहीं है। भारत का एनर्जी ट्रांजिशन इस बात से तय होगा कि देश रिन्यूएबल बिजली को कितनी कुशलता से स्टोर, डिस्पैच और उपयोग कर पाता है। इसी वजह से 2025 को वह साल माना जाएगा जब बैटरियां भारत की नवीकरणीय ऊर्जा नीति की मिसिंग लिंक’से निकलकर केंद्र में आ गईं।