अप्रैल 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एक आदेश पारित किया था जिसके तहत दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 10 साल पुराने डीजल वाहनों और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को चलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। क्या इससे छूट मिलने की कोई गुंजाइश है?
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक आवेदक को दिल्ली सरकार के प्राधिकरण के समक्ष अभिवेदन दाखिल करने की अनुमति दे दी। जिसने पहले दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती दी थी। आवेदक नागलक्ष्मी लक्ष्मी नारायणन ने तर्क दिया था कि 7 अप्रैल 2015 से लागू प्रतिबंध को पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं किया जाना चाहिए।
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अप्रैल 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एक आदेश पारित किया था जिसके तहत दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 10 साल पुराने डीजल वाहनों और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को चलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। यह प्रतिबंध मुख्य रूप से यहां वाहनों के प्रदूषण के स्तर को कम करने और मॉडर्न वाहनों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए लगाया गया था।
क्या है आवेदक की मांग
लाइव लॉ के अनुसार, प्रतिबंध को चुनौती देने वाले आवेदक ने मांग की थी कि प्रतिबंध भविष्य में लागू होना चाहिए न कि पिछली तारीख से। इसका मतलब है कि इसे एनजीटी के आदेश के बाद खरीदे गए वाहनों पर लगाया जाना चाहिए न कि पहले। बताया गया है कि आवेदक ने दिसंबर 2014 में ऑडी डीजल वाहन खरीदा था और कहा था कि पंजीकरण प्रमाणपत्र दिसंबर 2029 तक वैध है। लेकिन प्रतिबंध का मतलब है कि वाहन को दिसंबर 2024 से दिल्ली-एनसीआर में चलाने के लिए कानूनी रूप से अनुमति नहीं दी जाएगी।
'इन वाहनों को मिलनी चाहिए छूट'
आवेदक ने कथित तौर पर यह भी तर्क दिया था कि प्रतिबंध उन लोगों को असंगत रूप से प्रभावित करता है जिन्होंने आदेश लागू होने से पहले वाहन खरीदे थे। और इसकी वजह से वित्तीय नुकसान होता है। जबकि मालिकों को उनके वाहनों से वंचित किया जाता है और उन्हें किसी भी तरह का मुआवजा नहीं दिया जाता है। यह भी तर्क दिया गया कि यह प्रतिबंध निम्न और मध्यम आय वर्ग के लिए हानिकारक है जो हर 10 या 15 साल में वाहन बदलने का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं।
इसके अलावा, यह भी तर्क दिया गया कि जिन वाहनों का रखरखाव अच्छी तरह से किया जाता है, लेकिन वे एनजीटी द्वारा अनुमत आयु सीमा से पुराने हैं, उनका मूल्यांकन सिर्फ उम्र के बजाय उनकी स्थिति और पर्यावरणीय प्रभाव के आधार पर किया जाना चाहिए।
अब आवेदक को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली सरकार के समक्ष प्रतिबंध के खिलाफ अपनी शिकायतें दर्ज करने की अनुमति दे दी गई है।
क्या दिल्ली की सड़कों से पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए?
दिल्ली और एनसीआर से 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के औचित्य के बारे में परस्पर विरोधी राय है। राजधानी और आस-पास के इलाके दुनिया में सबसे प्रदूषित इलाकों में से एक हैं। और सर्दियों के मौसम की शुरुआत के साथ स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। हालांकि यह एकमात्र कारक नहीं है, वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन यहां जहरीली हवा में योगदान देता है।
क्या है आलोचकों का तर्क
पुराने वाहनों में उत्सर्जन का स्तर ज्यादा होने की संभावना अधिक होती है। लेकिन आलोचकों का तर्क है कि किसी वाहन की आयु के आधार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना सही नजरिया नहीं है, और इसके बहुआयामी प्रभाव हैं। वाहन कबाड़ नीति एक विकल्प प्रदान करती है। जहां केंद्र सरकार लोगों को नए वाहन खरीदने पर विभिन्न योजनाओं और प्रस्तावों के बदले में अपने मौजूदा, पुराने वाहनों को कबाड़ में डालने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। फिर भी, कई लोगों का तर्क है कि एक अच्छी तरह से मेंटेन वाहन को निरीक्षण और फिटनेस प्रमाणपत्र हासिल करने के बाद स्वतंत्र रूप से चलने की अनुमति दी जानी चाहिए।
इस समय, दिल्ली-एनसीआर में तय की गई आयु सीमा से ज्यादा पुराने वाहनों के ज्यादातर मालिकों के पास या तो वाहन को कबाड़ केंद्रों में भेजने या सेकेंड-हैंड बाजार में बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। जहां से ये वाहन आमतौर पर अन्य राज्यों में चले जाते हैं।