BS7 को लेकर सरकार का रुख क्या है
स्वच्छ उत्सर्जन की दिशा में कदम 2023 में तब और तेज हुए, जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने वाहन निर्माताओं से BS7 के लिए पहले से तैयारी करने को कहा था। उन्होंने जोर दिया था कि वैश्विक मानकों के अनुरूप नियम अपनाना जरूरी है, ताकि वाहनों से होने वाले प्रदूषण का स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर कम किया जा सके।
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BS7 उत्सर्जन मानक: आपकी कार खरीद पर क्या असर पड़ेगा
BS7 नियमों में कई अहम बदलाव होने की उम्मीद है, जिनका सबसे ज्यादा असर डीजल वाहनों पर पड़ सकता है। इनमें सबसे बड़ा बदलाव "ऑन-बोर्ड मॉनिटर" सिस्टम माना जा रहा है। यह सिस्टम गाड़ी के चलते समय, वास्तविक ड्राइविंग कंडीशन्स में उत्सर्जन को रियल-टाइम में मापेगा। यह मौजूदा BS6 में मौजूद ऑन-बोर्ड डायग्नोस्टिक्स से कहीं ज्यादा सख्त होगा।
इसके अलावा, नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) जैसे प्रदूषकों के लिए पेट्रोल और डीजल- दोनों पर समान और कड़े मानक लागू किए जा सकते हैं> जो लगभग 60 mg/km के स्तर पर होंगे। साथ ही, ब्रेक डस्ट और टायर से निकलने वाले कणों जैसे "नॉन-एग्जॉस्ट एमिशन" को भी नियमों के दायरे में लाया जा सकता है।
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डीजल इंजनों पर सबसे ज्यादा दबाव
जहां पेट्रोल इंजनों में सीमित बदलावों की संभावना है, वहीं डीजल इंजनों को बड़े तकनीकी अपग्रेड की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए एडवांस्ड आफ्टर-ट्रीटमेंट सिस्टम लगाने होंगे, जिससे लागत काफी बढ़ जाएगी।
इसी वजह से कई वाहन निर्माता पुराने डीजल इंजन प्लेटफॉर्म को अपग्रेड करना आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं मान रहे हैं। नतीजतन, कुछ मॉडलों की कीमतें बढ़ सकती हैं या उनकी बिक्री बंद होने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
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Fortuner, Harrier जैसे लोकप्रिय मॉडल पर असर
BS7 नियमों का असर सबसे ज्यादा डीजल एसयूवी सेगमेंट पर पड़ सकता है। टोयोटा फॉर्च्यूनर का 2.8-लीटर डीजल इंजन अक्सर ऐसे मॉडल के तौर पर गिनाया जाता है, जिस पर BS7 अपग्रेड महंगा साबित हो सकता है।
इसी तरह, टाटा हैरियर का 2.0-लीटर डीजल इंजन भी चुनौती का सामना कर सकता है। हालांकि टाटा के पास इसे संशोधित करने के अधिकार मौजूद हैं। एसयूवी और पिकअप सेगमेंट के अन्य डीजल-प्रधान मॉडल्स में कंपनियां पेट्रोल, हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर रुख कर सकती हैं।
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क्या डीजल कारों का दौर खत्म होने की ओर है?
ऑटो इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि BS7 पारंपरिक डीजल पैसेंजर वाहनों के लिए "धीरे-धीरे अंत" का संकेत हो सकता है। इससे कंपनियां मजबूत हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों पर ज्यादा जोर देंगी।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि BS7 को चरणबद्ध तरीके से, पहले बड़े शहरों में लागू किया जा सकता है। लेकिन कुल मिलाकर इससे वाहनों की कीमत बढ़ने की आशंका है। जिसका असर उन खरीदारों पर पड़ेगा जो डीजल एसयूवी को उसकी ताकत और बेहतर माइलेज के लिए पसंद करते हैं।
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आगे क्या?
फिलहाल BS7 के अंतिम स्वरूप और उसकी समय-सीमा को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। ऑटो कंपनियां रिसर्च और डेवलपमेंट में निवेश कर रही हैं। लेकिन अंतिम फैसला सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही सामने आएगा। तब तक BS7 भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए एक बड़ा और निर्णायक बदलाव बना हुआ है।
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