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Tire Sipes: टायर में बने बारीक कट क्या होते हैं और ये आपकी सुरक्षा के लिए क्यों जरूरी हैं?

Tue, 16 Dec 2025 05:20 PM IST
सुयश पांडेय ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

टायर के नीचे बनी बारीक लकीरों को 'साइप्स' कहा जाता है। ये देखने में साधारण लगती हैं लेकिन सड़क पर सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती हैं। ये छोटे कट गीली, बर्फीली और कम ग्रिप वाली सड़कों पर टायर की पकड़ बढ़ाते हैं और पानी को बाहर निकालने में मदद करते हैं
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टायर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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टायर हमें देखने में एक सामान्य रबर के गोल टुकड़े जैसे लग सकते हैं, लेकिन असल में वे काफी पेचीदा होते हैं। एक टायर में बीड्स, रेडियल कॉर्ड, इनर लाइनर और बेल्ट प्लाई जैसे कई हिस्से होते हैं। ये हमें दिखाई नहीं देते, लेकिन टायर की मजबूती और गुणवत्ता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। जब हम किसी टायर को देखते हैं, तो हमें मुख्य रूप से दो चीजें दिखाई देती हैं। एक तो साइडवॉल और दूसरा ट्रेड। साइडवॉल टायर का वह हिस्सा है जिस पर टायर का आकार, निर्माण और स्पीड रेटिंग जैसे नंबर लिखे होते हैं। वहीं ट्रेड यह टायर का वह हिस्सा है जो सड़क को छूता है। टायर के ट्रेड पर आपने अक्सर बारीक कट या लकीरें देखी होंगी। इन्हीं छोटी लकीरों को 'साइप्स' (Sipes) कहा जाता है। आइए जानते हैं कि ये क्या हैं और ये इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं।

साइप्स (Sipes) क्या हैं?

साइप्स टायर के ट्रेड ब्लॉक पर बने छोटे कट, दरारें या जिग-जैग पैटर्न होते हैं। इनका इतिहास काफी दिलचस्प है। इनका नाम जॉन एफ साइप (John F. Sipe) के नाम पर रखा गया है। 1920 के दशक में, जॉन ने फिसलन से बचने के लिए अपने जूतों के तलवों पर छोटे-छोटे कट लगाए थे। 1950 के दशक तक, यही तकनीक टायरों में भी इस्तेमाल होने लगी। ये साइप्स गीली, बर्फीली या कम ग्रिप वाली सड़कों पर टायर की पकड़ को मजबूत बनाते हैं।

ये कैसे काम करते हैं?

भले ही ये साधारण कट लगें, लेकिन साइप्स किसी 'पंजे' या 'दांत' की तरह काम करते हैं। ये सड़क पर 'बाइटिंग एजेस' यानी पकड़ने वाली सतह को बढ़ाते हैं। जब टायर घूमता है, तो ये साइप्स खुलते और फैलते हैं। यह पानी या बर्फ को अपने अंदर फंसाकर बाहर धकेलने में मदद करता है, जिससे रबर का संपर्क सड़क से बना रहता है। ये कट ट्रेड को थोड़ा लचीला बनाते हैं, जिससे टायर ठंडा रहता है और घर्षण से पैदा होने वाली गर्मी कम होती है। इससे टायर की उम्र बढ़ती है और सफर आरामदायक होता है।

साइप्स का महत्व और नई तकनीक

आजकल की आधुनिक तकनीक ने साइप्स को और भी बेहतर बना दिया है। अब ये केवल सीधी लकीरें नहीं होतीं। आधुनिक टायरों में Z-आकार के या इंटरलॉकिंग साइप्स होते हैं। ये कीचड़ और पानी को बाहर निकालने के लिए खुलते हैं और फिर आपस में लॉक हो जाते हैं ताकि ग्रिप बनी रहे। सही जगह पर लगाए गए साइप्स 'हाइड्रोप्लेनिंग' (पानी पर टायर का फिसलना) को रोकते हैं, माइलेज बढ़ाते हैं और ब्रेक लगाने पर गाड़ी को जल्दी रोकते हैं। यही कारण है कि ब्रांडेड और महंगे टायर सस्ते टायरों से बेहतर होते हैं, क्योंकि उनमें उन्नत रबर कंपाउंड और गहराई तक इंजीनियर किए गए साइप्स होते हैं।

क्या आपको अपने टायरों की 'साइपिंग' करवानी चाहिए?

बाजार में मिलने वाले नए टायरों में कंपनी से ही साइप्स बनकर आते हैं। लेकिन आजकल 'आफ्टरमार्केट साइपिंग' (Aftermarket Siping) का चलन भी सुनने को मिलता है, जहां लोग दुकान पर जाकर अपने टायरों में एक्स्ट्रा कट लगवाते हैं।

क्या यह सही है?

अगर आप ऐसी जगह रहते हैं जहां साल भर भारी बर्फबारी होती है, तो यह थोड़ा फायदेमंद हो सकता है। लेकिन अगर आप सामान्य सड़कों पर गाड़ी चलाते हैं, तो इससे बचें। बाहर से साइप्स लगवाने से टायर की वारंटी खत्म हो सकती है। सूखी सड़क पर टायर जल्दी खराब हो सकते हैं और उनकी मजबूती कम हो सकती है। कई जगहों पर यह गैरकानूनी भी है। 

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