ह्ययूमनॉइड और 4-लेग्ड रोबोटिक्स सेगमेंट में तेजी से अपनी बढ़त करने वाले चीन ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। चीन की नई-नई तकनीको को रोकने के लिए अमेरिका के रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों ने एक साथ मिलकर कदम उठाया है।
अमेरिकी सांसदों ने गार्ड एक्ट नाम से एक नया विधेयक पेश किया है। इसका मुख्य उद्देश्य चीने में बने उन्नत रोबोटिक सिस्टम्स को अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा बनने से रोकना है।
नया गार्ड एक्ट क्या है ?
- अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की एनर्जी एंड कॉमर्स कमेटी की कम्युनिकेशंस एंड टेक्नोलॉजी सब-कमेटी में प्रस्तावित विधेयक गार्ड एक्ट पर सुनवाई हुई। इस दौरान एआई, संचार सुरक्षा, ब्रॉडबैंड विस्तार और अवैध रोबोकॉल से जुड़े अन्य प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई।
- इस विधेयक का उद्देश्य चीन में निर्मित ह्यूमनॉइड और क्वाड्रुपेड (चार पैरों वाले) रोबोट्स को अमेरिका के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा बनने से रोकना है।
- समिति के अध्यक्ष ब्रेत गुथरी ने साफ किया कि अमेरिकी कांग्रेस पहले भी चीनी टेलीकॉम कंपनियों और ड्रोन्स पर पाबंदी लगा चुकी है। हाल ही में अमेरिकी संचार नेटवर्क को ठप करने की चीनी साजिशों के खुलासे के बाद नागरिकों के डेटा और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा प्राथमिकता हो गई है।
आखिर अमेरिका की चिंता क्यों बढ़ी?
दरअसल रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों के सांसदों ने कहा कि अमेरिका को तब तक इंतजार नहीं करना चाहिए, जब तक चीनी रोबोट्स उद्योगों और सरकारी सिस्टम में व्यापक स्तर पर इस्तेमाल होने लगें।
उनका मानना है कि चीन पहले ड्रोन बाजार में जिस रणनीति से वैश्विक बढ़त हासिल कर चुका है, अब वही मॉडल रोबोटिक्स सेक्टर में भी अपनाया जा रहा है।
जासूसी और साइबर हमले का खतरा
सांसदों के अनुसार इंटरनेट से जुड़े रोबोट केवल मशीन नहीं हैं, बल्कि ये डाटा भी इकट्ठा कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स की चिंता है कि ऐसे रोबोट्स संवेदनशील डेटा एकत्र कर सकते हैं। फैक्ट्री, अस्पताल, पावर प्लांट और सैन्य ठिकानों के भीतर निगरानी कर सकते हैं। रिमोट एक्सेस या सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं और भविष्य में साइबर हमलों का माध्यम बन सकते हैं।
कांग्रेस ने क्या कहा?
कमेटी के अध्यक्ष ब्रेट गुथरी ने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस पहले भी चीन निर्मित दूरसंचार उपकरणों और ड्रोन पर कार्रवाई कर चुकी है। इसलिए अपने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और नागरिकों के डेटाकी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क रहना और संभावित खतरों के खिलाफ समय से पहले ही कदम उठाना जरूरी है।
एक्सपर्ट्स को क्या है डर?
सुनवाई के दौरान एसोसिएशन फॉर अनक्रूड व्हीकल सिस्टम्स इंटरनेशनल (AUVSI) के अध्यक्ष और सीईओ माइकल रॉबिन्स ने कई चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए, जो इस प्रकार हैं...
- मार्केट पर नियंत्रण: चीनी कंपनियां दुनिया भर के ह्यूमनॉइड रोबोट्स की लगभग 90 प्रतिशत आपूर्ति पर कब्जा जमा चुकी हैं।
- सरकारी सब्सिडी का लाभ: चीनी सरकार की सब्सिडी के चलते ये रोबोट्स बेहद कम कीमत पर उपलब्ध हैं, जिससे अमेरिकी शोध संस्थान भी इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं।
- ट्रोजन हॉर्स का खतरा: रॉबिन्स के अनुसार, एक हैक किया गया लैपटॉप केवल डेटा चुरा सकता है, लेकिन सेंसर, मैपिंग और ऑडियो सुविधाओं से लैस एक कॉम्प्रोमाइज्ड (हैक) रोबोट किसी फैक्टरी, मिलिट्री बेस या पावर प्लांट के भीतर घूमकर लाइव निगरानी और भौतिक तोड़फोड़ भी कर सकता है। यह अमेरिकी धरती पर एक तरह का ट्रोजन हॉर्स साबित हो सकता है।
- रिमोट एक्सेस से जासूसी: ये कनेक्टेड सिस्टम डेटा को सीधे चीन (PRC) भेजते हैं। सॉफ्टवेयर अपडेट या रिमोट एक्सेस के जरिए ये काम कर रहे सिस्टम को पूरी तरह ठप्प या बिगाड़ सकते हैं।
AI ने बढ़ाई साइबर सुरक्षा की चुनौती
वहीं, व्हाइट हाउस की पूर्व टेक्नोलॉजी सलाहकार लिंडसे गोरमन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने साइबर सुरक्षा का पूरा परिदृश्य पूरी तरह बदल दिया है। उनके अनुसार AI साइबर हमलों की क्षमता को कई गुना बढ़ा रहा है।
इससे हमलावरों को पहले की तुलना में अधिक फायदा मिल सकता है। अमेरिका को कम लागत वाले AI मॉडल विकसित करने होंगे ताकि वह वैश्विक स्तर पर चीन से प्रतिस्पर्धा कर सके।
किन देशों के साथ सहयोग की सलाह?
इस दौरान एक्सपर्ट्स ने सुझाव दिया कि अमेरिका को भरोसेमंद सहयोगी देशों के साथ मिलकर सुरक्षित AI और रोबोटिक्स इकोसिस्टम तैयार करना चाहिए। उन्होंने जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, इजरायल, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों को इस दिशा में प्रमुख साझेदार बताया।
अन्य मुद्दों पर भी हुई चर्चा
- रोबोटिक्स के अलावा संसदीय समिति में कई अन्य तकनीकी प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई। इनमें AI की मदद से कम्युनिकेशन नेटवर्क मजबूत करना।
- फेडरल ब्रॉडबैंड समन्वय को बेहतर बनाना और विदेशों से संचालित अवैध रोबोकॉल नेटवर्क पर रोक लगाने के उपाय शामिल हैं।