प्रदूषण होगा कम, किसानों को होगा फायदा
गडकरी ने हाल ही में राज्यसभा में सवालों के जवाब देते हुए कहा, "हमारे पास दुनिया का सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है। 90 प्रतिशत सड़कें बिटुमिनस परतों का इस्तेमाल कर रही हैं। 2023-24 में बिटुमेन की खपत 88 लाख टन थी। 2024-25 में इसके 100 लाख टन होने की उम्मीद है। 50 प्रतिशत बिटुमेन आयात किया जाता है। और वार्षिक आयात लागत 25,000-30,000 करोड़ रुपये है।"
मंत्री ने कहा कि किसान अब न सिर्फ खाद्यान्न पैदा कर रहे हैं, बल्कि वे ऊर्जा उत्पादक भी बन गए हैं। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) और भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून ने धान की पराली से बायो-बिटुमेन विकसित किया है। मंत्री ने चिंता जताई कि पराली जलाने के कारण दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, "पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के कारण दिल्ली में प्रदूषण की समस्या है। अब हम चावल के भूसे से सीएनजी बना रहे हैं...अब किसान जो अन्नदाता, ऊर्जादाता हैं, वे बिटुमेनदाता बन जाएंगे... इससे कचरे से मूल्य सृजन में मदद मिलेगी और किसानों को भी लाभ होगा..."
देश में 400 प्रोजेक्ट
गडकरी का कहना है, "बायोमास से सीएनजी बनाने के लिए देश में 400 प्रोजेक्ट हैं...सीएनजी पेट्रोल से काफी सस्ती है। और सीएनजी से होने वाला प्रदूषण भी पेट्रोल से कम है...सीएनजी से काफी पैसा बचता है...इससे किसानों को काफी फायदा होगा..."