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Road Accidents: युद्ध, उग्रवाद, नक्सलवाद से भी अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में गंवाते हैं जान, गडकरी ने उठाए कदम

Wed, 28 Aug 2024 08:58 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि भारत में युद्ध, उग्रवाद और नक्सलवाद से भी अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं।
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Nitin Gadkari - फोटो : PTI
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विस्तार
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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि भारत में युद्ध, उग्रवाद और नक्सलवाद से भी अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं।
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FICCI रोड सेफ्टी अवार्ड्स एंड कॉन्क्लेव 2024 के छठे संस्करण को संबोधित करते हुए, गडकरी ने कहा कि सड़क परियोजनाओं की खराब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के कारण ब्लैकस्पॉट की संख्या बढ़ रही है। 

सालाना 5 लाख दुर्घटनाएं
उन्होंने कहा, "युद्ध, उग्रवाद और नक्सलवाद से भी अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं।" साथ ही यह भी कहा कि भारत में सालाना 5 लाख दुर्घटनाएं होती हैं और 1.5 लाख मौतें होती हैं। जबकि 3 लाख लोग घायल होते हैं। 

कौन है असली दोषी?
उन्होंने कहा, "इससे देश के सकल घरेलू उत्पाद को 3 प्रतिशत का नुकसान हुआ। बलि के बकरे की तरह, हर दुर्घटना के लिए एक ड्राइवर को दोषी ठहराया जाता है। मैं आपको बता दूं, और मैं बारीकी से देखता हूं - अक्सर, सड़क इंजीनियरिंग दोषी होती है।" 

लेन अनुशासन का पालन करना होगा
मंत्री ने सभी राजमार्गों का सुरक्षा ऑडिट कराने की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि दुर्घटनाओं की संख्या कम करने के लिए, "हमें लेन अनुशासन का पालन करना होगा"। 

एम्बुलेंस के लिए तैयार हो रहा है कोड
गडकरी ने कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय एम्बुलेंसों और उनके चालकों के लिए कोड तैयार कर रहा है। ताकि उन्हें सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को शीघ्र बचाने के लिए कटर जैसी अत्याधुनिक मशीनों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जा सके।

इस समय, एम्बुलेंस में अक्सर ये उपकरण नहीं होते हैं। जिससे फंसे हुए पीड़ितों को बचाने में तीन घंटे तक की देरी हो जाती है। 

बसों के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानक
गडकरी ने बताया कि आवश्यक उपकरण निर्धारित करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) से परामर्श किया गया है और पैरामेडिक्स को उनके उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि 2025 से सिर्फ अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाली बसों को ही अनुमति दी जाएगी। 
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सड़क सुरक्षा ऑडिट
गडकरी ने कहा, "यह निर्णय बसों के निर्माण में प्रचलित तरीकों को संबोधित करता है, जिसमें अक्सर हथौड़े, लकड़ी के तख्ते और एल्यूमीनियम शीट का इस्तेमाल किया जाता है।" उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन का मकसद सार्वजनिक परिवहन के सुरक्षा मानकों में उल्लेखनीय सुधार करना है।

मंत्री ने यह भी प्रस्ताव दिया कि उद्योग सड़क सुरक्षा ऑडिट करने के लिए इंजीनियरिंग कॉलेजों और आईआईटी को प्रायोजित करेंगे। 

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