किसने किया स्पेक्ट्रम आवंटन?
शुक्रवार को सड़क परिवहन मंत्रालय से जुड़ी संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में जानकारी देते हुए गडकरी ने कहा कि दूरसंचार विभाग ने V2V कम्युनिकेशन के लिए यह स्पेक्ट्रम तय किया है। मंत्रालय के अनुसार, यह स्पेक्ट्रम कनेक्टेड व्हीकल सिस्टम की बुनियाद बनेगा।
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कैसे काम करेगी V2V तकनीक?
V2V तकनीक के तहत वाहन आपस में सीधे संवाद कर सकेंगे और सड़क से जुड़ी अहम जानकारियां साझा करेंगे।
इससे वाहन:
- सामने, पीछे और साइड में मौजूद खतरों की सूचना दे सकेंगे
- सड़क के मोड़, ढलान और छिपे हुए जोखिमों को भी पहचान सकेंगे
- ड्राइवर की सीधी नजर में न आने वाले खतरे पर भी अलर्ट मिलेगा
- ADAS सिस्टम को मिलेगा बड़ा फायदा
यह तकनीक एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) के साथ इंटीग्रेट की जाएगी। इससे ADAS की प्रभावशीलता कई गुना बढ़ जाएगी और टक्कर, अचानक ब्रेकिंग या लेन बदलने जैसी स्थितियों में वाहन पहले से चेतावनी दे सकेंगे।
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प्रति वाहन कितना हो सकता है खर्च?
सरकार के अनुमान के मुताबिक, V2V आधारित सुरक्षा सिस्टम को वाहन में लगाने की लागत लगभग 5,000 रुपये से 7,000 रुपये प्रति वाहन हो सकती है। इसे भविष्य में बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना पर काम चल रहा है।
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नियम और मानक तैयार करने की प्रक्रिया जारी
परिवहन मंत्रालय ने बताया कि भारत में V2V तकनीक लागू करने के लिए फ्रेमवर्क, मानक और नियम तैयार किए जा रहे हैं। इसके पूरा होने के बाद इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से वाहनों में शामिल किया जा सकता है।
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दुनिया में V2V तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल
उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, 2024 तक दुनिया भर में 2 करोड़ से अधिक वाहन ऐसे थे जिनमें V2V-रेडी ऑनबोर्ड यूनिट्स लगी थीं। इसमें एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत रही।
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सड़क सुरक्षा के भविष्य की ओर भारत
30 GHz स्पेक्ट्रम का आवंटन भारत को कनेक्टेड और सुरक्षित मोबिलिटी की ओर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में V2V तकनीक दुर्घटनाओं को कम करने और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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