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Union Budget 2026: आम बजट से ईवी सेक्टर को बड़ी उम्मीदें, जानें क्या चाहता है इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग?

Mon, 26 Jan 2026 06:05 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय बजट 2026-27 महज एक हफ्ते दूर है और ईवी सेक्टर को उम्मीद है कि वित्त मंत्री सीतारमण भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की प्रक्रिया को तेज करने के मकसद से कुछ कदम उठाएंगी। 
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Electric Vehicles - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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केंद्रीय बजट 2026-27 में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) सेक्टर को लेकर काफी उम्मीदें हैं। डेलॉइट इंडिया ने इस बात पर जोर दिया है कि सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने, क्लीन मोबिलिटी को सपोर्ट करने और ईवी वैल्यू चेन में इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने पर फोकस कर सकती है।
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PLI स्कीम में बदलाव की संभावना
विशेषज्ञों के मुताबिक, बजट में प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) (पीएलआई) स्कीम को ईवी और एडवांस्ड ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स के लिए फिर से संतुलित किया जा सकता है। 

डेलॉइट इंडिया की पार्टनर शीना सरीन ने एएनआई को बताया कि आने वाले बजट में ईवी और एडवांस्ड ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स के लिए रीकैलिब्रेटेड प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) (पीएलआई) शामिल हो सकते हैं। इसके तहत निवेश और पात्रता की शर्तों को आसान करने की मांग है। ताकि ज्यादा कंपनियां खासतौर पर स्टार्टअप्स और छोटे सप्लायर्स इसका लाभ उठा सकें।
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Electric Vehicles - फोटो : AI
रिसर्च और डेवलपमेंट पर फोकस
उन्होंने यह भी कहा कि ईवी इकोसिस्टम में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) को केंद्रीय भूमिका देने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। बजट में रिसर्च, इनोवेशन और कैपिटल गुड्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए टैक्स राहत देने की उम्मीद है। इससे कंपनियों को नई तकनीकों पर काम करने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

लोकलाइजेशन और आयात निर्भरता घटाने की मांग
ईवी सेक्टर चाहता है कि बैटरी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य अहम कंपोनेंट्स के लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाए। घरेलू वैल्यू एडिशन के नियमों में कुछ ढील और कम निवेश थ्रेशहोल्ड से स्थानीय उत्पादन को गति मिल सकती है। इससे विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटेगी और कच्चे तेल के आयात में भी कमी आएगी।

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Electric Vehicles - फोटो : Adobe Stock
कैपिटल गुड्स के लिए अलग इंसेंटिव स्कीम
एक संभावित कैपिटल गुड्स इंसेंटिव स्कीम की भी चर्चा है, जिससे ईवी और ऑटोमोटिव सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले मशीनरी और उपकरणों का देश में ही निर्माण हो सके। अभी यह क्षेत्र काफी हद तक आयात पर निर्भर है। घरेलू क्षमता बढ़ने से पूरी सप्लाई चेन मजबूत हो सकती है।

GST में बड़ी राहत की उम्मीद कम
इनडायरेक्ट टैक्स को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी दरों में बड़े बदलाव की गुंजाइश सीमित है। जीएसटी 2.0 सुधारों के बाद छोटे वाहनों पर दरें कम हो चुकी हैं और मिड व हाई-एंड सेगमेंट पर टैक्स पहले से तय स्तर पर है। हालांकि, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर अब भी ईवी की लागत बढ़ा रहा है।

 

Electric Vehicles - फोटो : Adobe Stock
इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर पर राहत की मांग
उद्योग का सुझाव है कि अगर कैपिटल गुड्स और इनपुट सर्विसेज पर टैक्स रिफंड या एक्सपोर्ट से जुड़ी राहत दी जाए, तो ईवी की कीमतें कम हो सकती हैं। इससे सीधे तौर पर ईवी की किफायत और बिक्री दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

कस्टम्स प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर जोर
ईवी सेक्टर ने स्पेशल वैल्यूएशन ब्रांच (SVB) से जुड़े नियमों को सरल करने की भी मांग की है। खासतौर पर संबंधित पक्षों से आयात के मामलों में प्रोविजनल ड्यूटी और जटिल प्रक्रियाओं को खत्म करने से सप्लाई चेन ज्यादा कुशल और लागत स्पष्ट हो सकती है।

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Electric Vehicles - फोटो : Freepik
स्वच्छ मोबिलिटी और भविष्य की दिशा
भारत में स्वच्छ मोबिलिटी की ओर बदलाव फिलहाल CAFE (कैफे) मानकों के जरिए हो रहा है, न कि सीधे कार्बन टैक्स से। आने वाले समय में ये नियम और सख्त हो सकते हैं, जिससे इलेक्ट्रिफिकेशन, हाइब्रिड और लो-एमिशन टेक्नोलॉजी को और बढ़ावा मिलेगा।

बजट से क्या बदलेगा?
ईवी सेक्टर को उम्मीद है कि अगर बजट में इंसेंटिव, टैक्स राहत और रेगुलेटरी स्पष्टता का संतुलित मिश्रण दिया गया। तो इससे न सिर्फ भारत की क्लीन एनर्जी महत्वाकांक्षाओं को मजबूती मिलेगी। बल्कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी और लंबे समय में देश की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी। 

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