रिसर्च और डेवलपमेंट पर फोकस
उन्होंने यह भी कहा कि ईवी इकोसिस्टम में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) को केंद्रीय भूमिका देने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। बजट में रिसर्च, इनोवेशन और कैपिटल गुड्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए टैक्स राहत देने की उम्मीद है। इससे कंपनियों को नई तकनीकों पर काम करने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
लोकलाइजेशन और आयात निर्भरता घटाने की मांग
ईवी सेक्टर चाहता है कि बैटरी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य अहम कंपोनेंट्स के लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाए। घरेलू वैल्यू एडिशन के नियमों में कुछ ढील और कम निवेश थ्रेशहोल्ड से स्थानीय उत्पादन को गति मिल सकती है। इससे विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटेगी और कच्चे तेल के आयात में भी कमी आएगी।
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इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर पर राहत की मांग
उद्योग का सुझाव है कि अगर कैपिटल गुड्स और इनपुट सर्विसेज पर टैक्स रिफंड या एक्सपोर्ट से जुड़ी राहत दी जाए, तो ईवी की कीमतें कम हो सकती हैं। इससे सीधे तौर पर ईवी की किफायत और बिक्री दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
कस्टम्स प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर जोर
ईवी सेक्टर ने स्पेशल वैल्यूएशन ब्रांच (SVB) से जुड़े नियमों को सरल करने की भी मांग की है। खासतौर पर संबंधित पक्षों से आयात के मामलों में प्रोविजनल ड्यूटी और जटिल प्रक्रियाओं को खत्म करने से सप्लाई चेन ज्यादा कुशल और लागत स्पष्ट हो सकती है।
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स्वच्छ मोबिलिटी और भविष्य की दिशा
भारत में स्वच्छ मोबिलिटी की ओर बदलाव फिलहाल CAFE (कैफे) मानकों के जरिए हो रहा है, न कि सीधे कार्बन टैक्स से। आने वाले समय में ये नियम और सख्त हो सकते हैं, जिससे इलेक्ट्रिफिकेशन, हाइब्रिड और लो-एमिशन टेक्नोलॉजी को और बढ़ावा मिलेगा।
बजट से क्या बदलेगा?
ईवी सेक्टर को उम्मीद है कि अगर बजट में इंसेंटिव, टैक्स राहत और रेगुलेटरी स्पष्टता का संतुलित मिश्रण दिया गया। तो इससे न सिर्फ भारत की क्लीन एनर्जी महत्वाकांक्षाओं को मजबूती मिलेगी। बल्कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी और लंबे समय में देश की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी।