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Vehicle Scrappage Policy: पुराने वाहनों की विदाई से नया फायदा, स्क्रैपेज नीति के तहत करोड़ों की राहत

Mon, 26 Jan 2026 04:05 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्र की वॉलंटरी व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी के तहत लगभग 85,000 गाड़ी मालिकों ने लगभग 450 करोड़ रुपये के इंसेंटिव का फायदा उठाया है।
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Vehicle Scrap Policy - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्र सरकार की स्वैच्छिक वाहन स्क्रैपेज नीति, जिसे आधिकारिक तौर पर वाहन बेड़ा आधुनिकीकरण कार्यक्रम कहा जाता है, के तहत अब तक करीब 85,000 वाहन मालिकों को लाभ मिला है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, इन वाहन मालिकों को कुल मिलाकर लगभग 450 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन दिए जा चुके हैं।

टैक्स छूट से मिला सबसे बड़ा लाभ 

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इस योजना के तहत सबसे बड़ा फायदा मोटर वाहन टैक्स में छूट के रूप में मिला है। पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने पर मिलने वाले डिपॉजिट सर्टिफिकेट (CD) के बदले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने टैक्स रियायतें दी हैं।

अब तक 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने योजना लागू करते हुए

  • नॉन-ट्रांसपोर्ट वाहनों पर 25 प्रतिशत तक
  • ट्रांसपोर्ट वाहनों पर 15 प्रतिशत तक
मोटर वाहन टैक्स में छूट की घोषणा की है।

ऑटो कंपनियों की छूट भी बनी आकर्षण
सरकारी प्रोत्साहन के साथ-साथ 22 ऑटोमोबाइल कंपनियां भी स्क्रैपेज सर्टिफिकेट के बदले एक्स-शोरूम कीमत पर 1.5 से 3 प्रतिशत तक की छूट दे रही हैं। अब तक करीब 30,000 नए वाहनों की खरीद में इस छूट का लाभ उठाया जा चुका है।

हालांकि, ऑटो उद्योग का मानना है कि मौजूदा प्रोत्साहन पर्याप्त नहीं हैं। और स्क्रैपेज के जरिए मांग को और तेज करने के लिए अधिक सरकारी समर्थन की जरूरत है।

लाखों पुराने वाहन हुए स्क्रैप 
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में अब तक करीब 3.6 लाख वाहन पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों में नष्ट किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 1.6 लाख वाहन सरकारी बेड़े के थे, जिनकी उम्र 15 साल से अधिक हो चुकी थी। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकारी विभागों ने नीति का पालन अपेक्षाकृत तेजी से किया है।

यह भी पढ़ें - India-EU: भारत में यूरोपीय कारें हो सकती हैं सस्ती, आयात शुल्क में बड़ी कटौती की योजना

इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर जोर
स्क्रैपेज नीति को तेजी से लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता योजना को कई वित्तीय वर्षों तक बढ़ाया है।
इस योजना के तहत:

  • FY23 में 2,000 करोड़ रुपये
  • FY24 और FY25 में 3,000-3,000 करोड़ रुपये
  • FY26 में 2,000 करोड़ रुपये
का प्रावधान किया गया है।

FY23 से FY25 के बीच राज्यों को करीब 2,570 करोड़ रुपये जारी करने की सिफारिश की जा चुकी है।

स्क्रैपिंग और फिटनेस टेस्ट की बढ़ी क्षमता
देशभर में अब तक 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में

  • 180 वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों को मंजूरी मिली है, जिनमें से 123 चालू हो चुके हैं।
  • इसके अलावा, 407 ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 160 कार्यरत हैं।
  • ये केंद्र पुराने वाहनों की फिटनेस जांच और स्क्रैपिंग प्रक्रिया को आसान बना रहे हैं।

कब जरूरी है फिटनेस टेस्ट? 
स्क्रैपेज नीति के तहत:

  • निजी वाहनों को 20 साल बाद
  • कमर्शियल वाहनों को 15 साल बाद
ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्ट से गुजरना अनिवार्य है।

जो वाहन फिटनेस टेस्ट में फेल होते हैं, उन्हें अधिकृत केंद्रों पर स्क्रैप कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
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नीति का उद्देश्य क्या है?
सरकार के मुताबिक, इस नीति का मकसद

  • पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाना
  • वाहन उत्सर्जन और ईंधन आयात को कम करना
  • और बाजार आधारित तरीके से देश के वाहन बेड़े का आधुनिकीकरण करना है।
स्क्रैपेज नीति को सरकार भारत के ऑटो सेक्टर और पर्यावरण दोनों के लिए एक अहम सुधार के रूप में देख रही है। 

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