Union Budget 2025: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को लगातार आठवीं बार बजट पेश किया। इस दौरान उन्होंने कई बड़े एलान किए। जिसमें घरेलू विनिर्माण और मूल्य संवर्धन को समर्थन देने के लिए अप्रत्यक्ष कर (इनडायरेक्ट टैक्स) के उपाय पेश किए गए।
सीतारमण ने एलान किया कि कोबाल्ट पाउडर और अपशिष्ट, लिथियम-आयन बैटरी का स्क्रैप, सीसा, जिंक और 12 अन्य महत्वपूर्ण खनिजों को मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) से छूट दी जाएगी।
इसके अलावा उन्होंने कहा, "छूट प्राप्त पूंजीगत वस्तुओं की सूची में, मैं ईवी बैटरी विनिर्माण के लिए 35 पूंजीगत वस्तुओं और मोबाइल फोन बैटरी विनिर्माण के लिए 28 अतिरिक्त पूंजीगत वस्तुओं को जोड़ने का प्रस्ताव करती हूं। इससे मोबाइल फोन और ई-वाहनों दोनों के लिए लिथियम-आयन बैटरी के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा।"
वित्र मंत्री ने बजट एलान के बाद यह माना जा सकता है कि इलेक्ट्रिक वाहन सस्से होंगे। चूंकि बैटरी की कीमतों में कमी आएगी, जिसका सीधा असर ईवी की कीमतों पर पड़ेगा। इलेक्ट्रिक वाहन में बैटरी की ज्यादा कीमत, ईवी की लागत को बढ़ा देते हैं।
भाषण में ऑटो सेक्टर के लिए क्या कहा
वित्त मंत्री ने अपने बजटीय भाषण में कहा, "हमारी सरकार मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाने के लिए छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों को शामिल करते हुए एक राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन स्थापित करेगी। जलवायु-अनुकूल विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को देखते हुए, मिशन स्वच्छ तकनीक विनिर्माण का समर्थन करेगा। इसका मकसद घरेलू मूल्य संवर्धन में सुधार करना और सौर पीवी सेल, ईवी बैटरी, मोटर और नियंत्रक इलेक्ट्रोलाइजर, विंड टर्बाइन और ग्रिड स्केल बैटरी के लिए हमारे इकोसिस्टम का निर्माण करना होगा।"
बजट में क्या तय किया जाता है
केंद्रीय बजट भारत की वार्षिक वित्तीय योजना है, जो देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करता है। यह सिर्फ एक संवैधानिक अनिवार्यता नहीं है, बल्कि एक प्रभावशाली उपकरण भी है, जो वित्तीय नीतियों, विकास प्राथमिकताओं और बाजार की गतिशीलता को आकार देता है। कर नीतियों, बुनियादी ढांचे पर खर्च और विभिन्न क्षेत्रों के लिए विशेष योजनाओं के जरिए, यह न सिर्फ व्यापारिक माहौल बल्कि आम नागरिकों के जीवन पर भी सीधा असर डालता है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर, खासकर छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए, बजट का खास महत्व होता है। जीएसटी दरों में बदलाव, ऑटो पार्ट्स पर आयात शुल्क और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाली योजनाओं से इस क्षेत्र की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आ सकता है। बजट में बुनियादी ढांचे के विकास, खासकर सड़कों और परिवहन पर किया गया निवेश, ऑटोमोबाइल की मांग को सीधे प्रभावित करता है। ऑटोमोबाइल MSME, जो ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की रीढ़ माने जाते हैं, उनके लिए वर्किंग कैपिटल सपोर्ट (कार्यशील पूंजी सहायता), टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड और आसान कर्ज उपलब्धता जैसी बजट योजनाएं उनके विकास और अस्तित्व के लिए बेहद जरूरी होती हैं।
इलेक्ट्रिक वाहन होंगे सस्ते
बजट में FAME (फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) और PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) जैसी योजनाओं पर दिया गया जोर, ऑटोमोबाइल सेक्टर में निवेश के फैसलों को प्रभावित करता है। छोटे उद्यमों के लिए, कौशल विकास, क्लस्टर विकास और कच्चे माल की लागत प्रबंधन से जुड़ी योजनाएं उनके विकास और ठहराव के बीच अंतर पैदा कर सकती हैं।
केंद्रीय बजट भारत की आर्थिक प्रगति की रफ्तार तय करता है। जहां वित्तीय अनुशासन और विकास की जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखा जाता है। ऑटोमोबाइल MSME सेक्टर के लिए, यह बजट या तो सहायक नीतियों से उनके विकास को तेज कर सकता है या फिर नियामकीय बदलावों के जरिए चुनौतियां खड़ी कर सकता है। इस वजह से, यह हर साल आने वाला एक महत्वपूर्ण आयोजन होता है, जो उनके व्यापारिक निर्णयों को दिशा देता है।