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Uber: उबर पर बढ़ा कानूनी संकट, यौन उत्पीड़न के मामलों-नियमों की अनदेखी को लेकर शेयरधारकों का बोर्ड पर मुकदमा

Tue, 23 Jun 2026 10:24 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राइड-हेलिंग कंपनी उबर टेक्नोलॉजीज अमेरिका में एक नए कानूनी विवाद में घिर गई है। कंपनी के शेयरधारकों ने उबर के बोर्ड और प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दायर करते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने बार-बार अनुपालन से जुड़ी चिंताओं को नजरअंदाज किया। उनके मुताबिक, इसी वजह से कंपनी को यौन उत्पीड़न और यौन हमलों से जुड़े हजारों मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है और कानूनी जोखिम लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
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उबर - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिग्गज राइड-हेलिंग कंपनी उबर टेक्नोलॉजीज (Uber Technologies) एक बार फिर बड़े कानूनी संकट में घिर गई है। इस बार कंपनी को यह चुनौती बाहर से नहीं, बल्कि अपने ही शेयरधारकों से मिली है। उबर के शेयरधारकों ने कंपनी के बोर्ड और मैनेजमेंट के खिलाफ एक बड़ा मुकदमा दायर किया है।

आरोप है कि बोर्ड ने सुरक्षा और नियमों से जुड़ी चिंताओं को लगातार नजरअंदाज किया, जिसकी वजह से ड्राइवरों द्वारा यौन उत्पीड़न और हैरेसमेंट के दावों को लेकर हजारों केस दर्ज हुए। इन लापरवाहियों ने कंपनी को बहुत बड़े कानूनी और आर्थिक जोखिम में डाल दिया है।

सैन फ्रांसिस्को की फेडरल कोर्ट में सोमवार को दायर इस मुकदमे की कमान डेट्रॉइट के एक पेंशन फंड के नेतृत्व में शेयरधारकों ने संभाली है। उन्होंने आरोप लगाया कि ड्राइवरों द्वारा किए जा रहे यौन शोषण को रोकने में कंपनी के नाकाम रहने पर जब आंतरिक और बाहरी चेतावनियां मिलीं, तो उबर के डायरेक्टरों ने उन्हें सिरे से खारिज कर दिया।

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शेयरधारकों ने बोर्ड पर और क्या गंभीर आरोप लगाए हैं?

अदालत में की गई शिकायत के अनुसार, उबर के बोर्ड की लापरवाही सिर्फ यौन उत्पीड़न के मामलों तक ही सीमित नहीं थी। शेयरधारकों ने कंपनी की निगरानी में हुई अन्य बड़ी कमियों का भी जिक्र किया है, जिनकी वजह से पिछले साल अमेरिकी संघीय सरकार द्वारा भी दो बड़े केस दर्ज किए गए थे:

  • दिव्यांग यात्रियों के साथ भेदभाव: सरकार द्वारा दर्ज पहले केस में आरोप लगाया गया कि उबर अक्सर उन दिव्यांग यात्रियों को सेवा देने से मना कर देता है। जिनके पास सर्विस एनिमल्स (सहायता करने वाले जानवर) या मोड़ने वाली व्हीलचेयर होती हैं।

  • धोखाधड़ी से बिलिंग: दूसरे केस में कंपनी की 'उबर वन' (Uber One) सब्सक्रिप्शन सर्विस से जुड़ी धोखाधड़ी वाली बिलिंग और कैंसिलेशन प्रक्रियाओं के आरोप लगाए गए।

शिकायत पत्र में सख्त शब्दों में कहा गया कि "उबर नियमों का आदतन उल्लंघन करने वाला है," और मीडिया में आई नकारात्मक खबरों की वजह से कंपनी की साख को कभी न ठीक होने वाला नुकसान पहुंचा है।

 

इस पूरे मामले पर उबर का क्या कहना है?

सैन फ्रांसिस्को स्थित उबर के प्रवक्ता ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है। कंपनी के प्रवक्ता का कहना है:

"यह मुकदमा महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज करता है और अन्य बेबुनियाद मुकदमों के भ्रामक और झूठे बयानों पर आधारित है, जिनका जवाब हम पहले ही सार्वजनिक रूप से और अदालत में दे चुके हैं।"

दूसरी तरफ, शेयरधारकों का प्रतिनिधित्व कर रहे 'पुलिस एंड फायर रिटायरमेंट सिस्टम ऑफ द सिटी ऑफ डेट्रॉइट' के वकीलों ने इस मामले पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की है। इस डेरिवेटिव मुकदमे के जरिए मांग की गई है कि डायरेक्टर अपनी कानूनी जिम्मेदारियों और प्रतिभूति कानूनों के उल्लंघन के लिए उबर को हर्जाना दें, जिससे आखिरकार शेयरधारकों को फायदा हो।

क्या कंपनी के सीईओ भी इस मुकदमे के दायरे में हैं?

जी हां, उबर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) दारा खोसरोशाही भी इस केस में नामजद आरोपियों में शामिल हैं।

  • कम निवेश का आरोप: शेयरधारकों का कहना है कि लगभग 9 वर्षों के अपने कार्यकाल के दौरान दारा खोसरोशाही अपने पूर्ववर्ती (पुराने सीईओ) की तुलना में नियमों की धज्जियां उड़ाने में थोड़े कम आक्रामक जरूर रहे हैं। लेकिन उन्होंने कंप्लायंस (नियमों के पालन) के उपायों में हमेशा जरूरत से कम निवेश किया।

  • हजारों पेंडिंग केस: आंकड़ों की बात करें तो 1 जून तक उबर सैन फ्रांसिस्को की अदालत की निगरानी में ऐसे 3,571 मुकदमों का सामना कर रही थी। जिनमें वादियों ने ड्राइवरों पर यौन दुराचार के आरोप लगाए हैं।

  • भरोसे की कमी: शिकायत में यह भी खुलासा किया गया है कि उबर के बोर्ड को बार-बार सूचित किया गया था कि 40 प्रतिशत से भी कम यूजर्स ऐसा मानते हैं कि कंपनी सुरक्षा को गंभीरता से लेती है।

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हाल ही में उबर और न्यूयॉर्क शहर के बीच क्या विवाद हुआ?

यह कानूनी लड़ाई ऐसे समय पर आई है जब सुरक्षा को लेकर कंपनी पहले से ही संघर्ष कर रही है। इसी महीने की शुरुआत में, उबर और उसकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी लिफ्ट (Lyft) ने न्यूयॉर्क शहर के खिलाफ एक नया कानून रोकने के लिए मुकदमा दायर किया था। दोनों कंपनियों का दावा है कि यह नया कानून उन्हें उन ड्राइवरों को हटाने से रोकेगा जो यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा बनते हैं।

लगातार आ रही इन नकारात्मक खबरों का असर कंपनी के कारोबार पर भी दिख रहा है। 22 सितंबर को अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद से अब तक उबर के शेयरों की कीमत में 25 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है। 

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