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Traffic Rules: बेवजह हॉर्न बजाने से होते हैं कई गंभीर नुकसान, 90% लोग नहीं जानते इसके कारण भी कट सकता है चालान

Mon, 03 Feb 2025 04:05 PM IST
नीतीश कुमार ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Unnecessary Honking: वाहन चलाने वाले 90% लोगों को पता भी नहीं होता कि प्रतिबंधित क्षेत्रो में बेवजह हॉर्न बजाना अपराध है और ऐसा करते पकड़े जाने पर चालान कट सकता है। आइए समझते हैं कि बेवजह हॉर्न बजाने के क्या-क्या नुकसान हैं।
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बेवजह हॉर्न बजाने के हैं कई नुकसान - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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भारत की सड़कों पर ट्रैफिक जाम और शोर-शराबा आम बात है, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा परेशान करने वाली चीज है बेवजह हॉर्न बजाना। कुछ लोग जरा-सी देरी होने पर भी तेज हॉर्न बजाने लगते हैं, जिससे न केवल सड़क पर मौजूद लोगों को परेशानी होती है, बल्कि इसका असर हमारे स्वास्थ्य, समाज और पर्यावरण पर भी पड़ता है। 
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दरअसल, वाहन चलाने वाले 90% लोगों को पता भी नहीं होता कि प्रतिबंधित क्षेत्रो में बेवजह हॉर्न बजाना अपराध है और ऐसा करते पकड़े जाने पर जुर्माने का भी प्रावधान है। आइए समझते हैं कि बेवजह हॉर्न बजाने के क्या-क्या नुकसान हैं और ऐसे करने पर मोटर वाहन नियम के तहत ट्रैफिक पुलिस कितने रुपये का चालान काट सकती है।

सेहत पर पड़ता है बुरा असर

सेहत पर पड़ता है बुरा असर - फोटो : Freepik.com
लगातार तेज हॉर्न सुनने से कानों पर दबाव पड़ता है और लंबे समय तक शोर में रहने से सुनने की शक्ति कम हो सकती है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, 85 डेसिबल (dB) से ज्यादा के शोर के वजह से सुनने की क्षमता को नुकसान हो सकता है। भारत में ट्रैफिक हॉर्न अक्सर 90-110 डेसिबल के बीच होते हैं, जो कानों के लिए बेहद खतरनाक है।

तेज हॉर्न का शोर दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव डालता है और तनाव, गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ाता है। लंबे समय तक शोर में रहने से नींद खराब हो सकती है, जिससे थकान और एकाग्रता में कमी आती है।

इसके अलावा, हार्ट और ब्लड प्रेशर के मरीजो पर भी इसका बुरा असर होता है। तेज हॉर्न सुनने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा होता है। ज्यादा शोर वाले इलाकों में रहने वालों को हाई BP और हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा होता है।
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कानूनी प्रावधान और जुर्माना

कानूनी प्रावधान और जुर्माना - फोटो : Adobe Stock
मोटर वाहन संशोधित अधिनियम 2019 के तहत अनावश्यक हॉर्न बजाना गैरकानूनी है। कई राज्यों में नो हॉर्न जोन बनाए गए हैं, जैसे कि हॉस्पिटल, स्कूल और रेजिडेंशियल एरिया। अनावश्यक हॉर्न बजाने पर ₹1,000 से ₹2,000 तक का जुर्माना लग सकता है।

कुछ शहरों में ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियम भी लागू किए गए हैं, जिनके तहत जरूरत से ज्यादा शोर करने पर जेल भी हो सकती है।
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