सेहत पर पड़ता है बुरा असर
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लगातार तेज हॉर्न सुनने से कानों पर दबाव पड़ता है और लंबे समय तक शोर में रहने से सुनने की शक्ति कम हो सकती है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, 85 डेसिबल (dB) से ज्यादा के शोर के वजह से सुनने की क्षमता को नुकसान हो सकता है। भारत में ट्रैफिक हॉर्न अक्सर 90-110 डेसिबल के बीच होते हैं, जो कानों के लिए बेहद खतरनाक है।
तेज हॉर्न का शोर दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव डालता है और तनाव, गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ाता है। लंबे समय तक शोर में रहने से नींद खराब हो सकती है, जिससे थकान और एकाग्रता में कमी आती है।
इसके अलावा, हार्ट और ब्लड प्रेशर के मरीजो पर भी इसका बुरा असर होता है। तेज हॉर्न सुनने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा होता है। ज्यादा शोर वाले इलाकों में रहने वालों को हाई BP और हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा होता है।
कानूनी प्रावधान और जुर्माना
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मोटर वाहन संशोधित अधिनियम 2019 के तहत अनावश्यक हॉर्न बजाना गैरकानूनी है। कई राज्यों में नो हॉर्न जोन बनाए गए हैं, जैसे कि हॉस्पिटल, स्कूल और रेजिडेंशियल एरिया। अनावश्यक हॉर्न बजाने पर ₹1,000 से ₹2,000 तक का जुर्माना लग सकता है।
कुछ शहरों में ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियम भी लागू किए गए हैं, जिनके तहत जरूरत से ज्यादा शोर करने पर जेल भी हो सकती है।