Maruti Suzuki e Vitara Electric Car Interior
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आजकल कारें सिर्फ चलाने का जरिया नहीं रह गई हैं, बल्कि स्मार्ट टेक्नोलॉजी से लैस होकर ड्राइविंग को ज्यादा सुरक्षित, आसान और आरामदायक बना रही हैं। खासतौर पर ADAS (Advanced Driver Assistance System), कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी, और ऑटोमैटिक ड्राइविंग जैसी सुविधाएं अब भारत में भी उपलब्ध हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ये क्या हैं और हमारे लिए कैसे फायदेमंद हैं।
1. ADAS (Advanced Driver Assistance System) – ड्राइविंग को सुरक्षित बनाने वाली तकनीक
ADAS in India
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ADAS एक ऐसी तकनीक है जो ड्राइवर की मदद करती है और सड़क पर दुर्घटनाओं को कम करने में मदद करती है। इसमें कई सेफ्टी फीचर्स शामिल होते हैं:
लेन डिपार्चर वार्निंग: अगर कार गलती से अपनी लेन से बाहर जाने लगती है, तो सिस्टम ड्राइवर को अलर्ट कर देता है।
लेन कीप असिस्ट: कार खुद ही स्टीयरिंग कंट्रोल करके लेन में रहने में मदद करती है।
एडाप्टिव क्रूज़ कंट्रोल: यह सिस्टम कार की स्पीड को आगे वाली गाड़ी के हिसाब से एडजस्ट कर देता है।
ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग: अगर सामने अचानक कोई रुक जाए, तो कार खुद ही ब्रेक लगा सकती है।
ब्लाइंड स्पॉट डिटेक्शन: साइड मिरर में न दिखने वाली गाड़ियों का पता लगाकर ड्राइवर को अलर्ट करता है।
भारत में Mahindra XUV700, MG Astor, Tata Harrier और Safari (नई मॉडल) जैसी कुछ कारें ADAS के साथ आती हैं।
2. कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी – कार और मोबाइल का कनेक्शन
Connected Car Technology
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अब कारें भी स्मार्टफोन की तरह इंटरनेट से जुड़ने लगी हैं। कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी की मदद से हम अपने मोबाइल से ही कार को कंट्रोल कर सकते हैं।
इस टेक्नोलॉजी के फायदे:
रिमोट कंट्रोल: मोबाइल ऐप से कार को लॉक/अनलॉक कर सकते हैं और एसी ऑन कर सकते हैं।
नेविगेशन: लाइव ट्रैफिक अपडेट के साथ रूट मैपिंग।
कार की सेहत की जानकारी: बैटरी, टायर प्रेशर, फ्यूल लेवल जैसी जानकारियां ऐप पर मिलती हैं।
एंटी-थेफ्ट अलर्ट: चोरी होने पर तुरंत नोटिफिकेशन मिलता है।
वॉइस कमांड: Alexa और Google Assistant से कार को कंट्रोल किया जा सकता है।
3. ऑटोमैटिक ड्राइविंग
Head up Display in Car
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ऑटोमैटिक ड्राइविंग वाली कारें बिना ड्राइवर के ज्यादा दखल दिए आपने आप चलने में सक्षम होती हैं। अभी भारत में पूरी तरह से सेल्फ-ड्राइविंग कारें नहीं आई हैं, लेकिन कई सेमी-ऑटोमैटिक फीचर्स उपलब्ध हैं।
ऑटोमैटिक ड्राइविंग के स्तर:
लेवल 1: क्रूज कंट्रोल, लेन असिस्ट जैसी बेसिक सुविधाएं।
लेवल 2: ADAS जैसी टेक्नोलॉजी, जो ड्राइवर की मदद करती है।
लेवल 3: कुछ खास परिस्थितियों में कार खुद चलेगी।
लेवल 4-5: पूरी तरह से सेल्फ-ड्राइविंग कारें (जो भारत में अभी नहीं हैं)।
क्या भारत में सेल्फ-ड्राइविंग कारें सफल होंगी?
भारत की सड़कों पर ट्रैफिक काफी अनियमित है, जिससे पूरी तरह ऑटोमैटिक कारों के लिए दिक्कत हो सकती है। अभी सरकार ने सेल्फ-ड्राइविंग कारों के लिए कोई स्पष्ट नियम नहीं बनाए हैं। हालांकि, आने वाले वर्षों में ADAS और कनेक्टेड टेक्नोलॉजी के जरिए भारत में भी ऑटोमैटिक ड्राइविंग को बढ़ावा मिल सकता है।