एक गाड़ी में टायर्स का अहम रोल होता है क्योकिं पूरी गाड़ी टायर्स पर ही टिकी होती है, लेकिन अक्सर देखने में आता है कि लोग अपनी गाड़ी के टायर्स पर ध्यान नहीं देते और खराब टायर्स को कई सालों तक चेंज नहीं करते। जिसकी वजह से कई बार टायर के पंचर होने और टायर फटने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। इस रिपोर्ट में हम आपको 5 ऐसे संकेत बता रहे हैं जिनसे आपको पता चल जाएगा की गाड़ी में अब टायर्स कब बदलने चाहिये।
- ट्रेड टॉयर की उपरी परत होती है और काफी चलने के बाद यह घिसने लग जाता है। यदि आपके टॉयर का ट्रेड लगभग 1.6 मिलीमीटर से कम हो गया हो तो यह इस बात का संकेत है कि आपकी गाड़ी को नये टॉयर्स की जरूरत है।
- आपको गाड़ी लगातार खराब और पथरिले रास्तों पर ज्यादा चलती है तो जाहिर सी बात है टायर्स की लाइफ कम ही होगी, टायर्स में यदि उभार नज़र आने लगे तो यह भी नये टॉयर्स के बदलने संकेत है। ऐसे में कोशिश कीजिये की साफ़-सुथरे रास्तों पर गाड़ी चलायें।
- जब टायर पुराना होने लगता है और ज्यादा चलता है तो उसके साइड हिस्से पर दरार नज़र आने लगती हैं जोकि सही संकेत नहीं होते, ऐसे में स्पीड में गाड़ी चलाने पर यह फट जाते हैं। ऐसे में नए टायर्स डलवा लेने चाइये
- अगर ड्राइव करते समय आपको वाइब्रेशन जैसा महसूस होने लगे तो इस बात को नज़र अंदाज़ बिलकुल नहीं करें खराब रास्तों पर ऐसा स्वाभाविक है किन्तु सपाट सड़क पर भी ऐसा महसूस होने लगे तो तुरंत ही मकैनिक की सलाह लें औएर यदि जरूरत पड़े तो टायर्स भी बदलवा लें।
- टॉयर के बीच में जो गैप दिया जाता है उसमें एक बिट होता, यह एक इंडीकेटर बार होता है, जिसकी उंचाई टॉयर के ट्रेड यानी की बाहरी सतह से कम होती है। यह बिट टॉयर के बाहरी सतह की उंचाई घिसते हुए बिट के बराबर आ जाये तो यह समझ लेना चाइये की कार को नए टायर्स की आवश्यकता है।