फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदल गया कार खरीदारों का मिजाज: हैचबैक को पीछे छोड़ आगे निकलीं एसयूवी-एमपीवी, आखिर क्यों बढ़ रहीं इनकी डिमांड?

Wed, 02 Sep 2026 09:22 AM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय ग्राहकों का रुझान अब छोटी कारों के बजाय बड़ी गाड़ियों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। अगस्त 2026 के बिक्री आंकड़ों से इसकी साफ तस्वीर सामने आती है। यूटिलिटी व्हीकल्स यानी एसयूवी और एमपीवी की मांग लगातार मजबूत हो रही है। इसका असर न केवल बिक्री पर, बल्कि कंपनियों के उत्पादन पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
 
विज्ञापन
छोटी कारों को पछाड़ आगे निकलीं एसयूवी-एमपीवी - फोटो : एआई जनरेटेड
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश की बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती पांच महीनों में कुल बिक्री का आंकड़ा दस लाख यूनिट के पार पहुंचा दिया है। कंपनी ने अगस्त में कुल 2.19 लाख से ज्यादा वाहन बेचे। इस दौरान घरेलू पैसेंजर व्हीकल बिक्री में 34.8 फीसदी की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई।

विज्ञापन


एसयूवी-एमपीवी की बिक्री में तेज उछाल

  • मारुति सुजुकी के यूटिलिटी व्हीकल्स में ब्रेजा, अर्टिगा, फ्रोंक्स, ग्रैंड विटारा और ई-विटारा जैसे मॉडल शामिल हैं। अगस्त में इनकी घरेलू बिक्री 46.2 फीसदी बढ़कर 79,045 यूनिट हो गई।
  • कंपनी ने उत्पादन में भी यूटिलिटी व्हीकल्स पर खास जोर दिया गया है। इस सेगमेंट में उत्पादन 67.14 फीसदी बढ़कर 97,922 यूनिट पहुंच गया।
  • वहीं, दिग्गज कंपनी महिंद्रा ने भी अगस्त में कुल बिक्री में 42 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की और कंपनी ने 1.07 लाख से ज्यादा वाहन बेचे।


कौन सी गाड़ियां ज्यादा पसंद कर रहे ग्राहक?

  • अब अगर ग्राहकों के पसंद की बात की जाए तो कॉम्पैक्ट और छोटी कारों की तुलना में यूटिलिटी व्हीकल्स इन्हें ज्यादा आकर्षित कर रही है। धीरे-धीरे यह ग्राहकों की पहली पसंद बनती जा रही हैं। यूटिलिटी व्हीकल्स में 67 फीसदी का उछाल देखा गया। इस कैटेगरी में ब्रेजा, फ्रोंक्स, अर्टिगा, स्कॉर्पियो-एन, क्रेटा और ग्रैंड विटारा जैसे मॉडल प्रमुख हैं।
  • वहीं कॉम्पैक्ट कारों में 28.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस सेगमेंट में स्विफ्ट, बलेनो, वैगनआर और डिजायर जैसे मॉडल शामिल हैं। सबसे छोटी कारों की बिक्री में सिर्फ 4.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इस कैटेगरी में ऑल्टो और एस-प्रेसो जैसे मॉडल आते हैं।

विज्ञापन

एसयूवी की मांग इतनी क्यों बढ़ रही है?

1. खराब सड़कों पर ज्यादा भरोसा

  • एसयूवी अपनाने का एक कारण ग्राउंड क्लीयरेंस भी नजर आता है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि अभी भी भारत के कई शहरों और इलाकों में खराब सड़कें और जलभराव बड़ी समस्या बने हुए हैं। ऐसे में ग्राहक जमीन से ज्यादा ऊंची गाड़ियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। एसयूवी का ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस ऐसी परिस्थितियों में उपयोगी माना जाता है।
  • इसके अलावा दूसरा पहलू सुरक्षा का देखा जा रहा है। छह एयरबैग जैसी सेफ्टी सुविधाओं से लैस गाड़ियों की मांग भी बढ़ रही है। ग्राहक अब खरीदारी के दौरान सिर्फ कीमत और माइलेज ही नहीं, बल्कि सुरक्षा को भी महत्व दे रहे हैं।


2. आसान लोन और इएमआई ने बदली पसंद

  • साथ ही आसान ऑटो लोन और लचीली इएमआई ने भी ग्राहकों की पसंद बदलने में भूमिका निभाई है। पहली बार कार खरीदने वाला मध्यम वर्ग अब पहले की तरह चार से पांच लाख रुपये की छोटी कार तक सीमित नहीं रहना चाहता।
  • इसके बजाय कई खरीदार आठ से 12 लाख रुपये की कॉम्पैक्ट या माइक्रो-एसयूवी को प्राथमिकता दे रहे हैं। यानी ज्यादा बजट खर्च करके बड़ी और ज्यादा फीचर वाली कार खरीदने का चलन बढ़ रहा है।


3. त्योहारी सीजन की तैयारी
इन आंकड़ों के बाहर आने के बाद कंपनियां भी बिक्री की तैयारी में जुट गई हैं। सितंबर से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन को देखते हुए कंपनियां उत्पादन बढ़ा रही हैं। ज्यादा मांग की उम्मीद में यूटिलिटी व्हीकल्स का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है, ताकि ग्राहकों को पसंदीदा मॉडल की डिलीवरी के लिए ज्यादा इंतजार न करना पड़े। 

छोटी कारों के लिए बढ़ी चुनौती

  • अब यहां पर एसयूवी और एमपीवी की बढ़ती लोकप्रियता छोटी कारों के लिए चुनौती बन रही है। खासकर उन ग्राहकों के बीच जो पहले एंट्री-लेवल हैचबैक को प्राथमिकता देते थे, लेकिन अब कॉम्पैक्ट एसयूवी एक आकर्षक विकल्प बनकर उभर रही है।
  • हालांकि यह बात भी गलत नहीं है कि छोटी कारों की उपयोगिता अभी खत्म नहीं हुई है। कम कीमत, आसान ड्राइविंग और बेहतर शहर-केंद्रित उपयोग की वजह से इनकी अपनी जगह बनी हुई है, लेकिन अगस्त के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय खरीदारों की पसंद बड़ी गाड़ियों की तरफ तेजी से बढ़ रही है।


क्या एसयूवी-एमपीवी का दौर और मजबूत होगा?

  • बिक्री और उत्पादन के मौजूदा रुझान को देखते हुए एक्सपर्ट्स एसयूवी और एमपीवी सेगमेंट का दबदबा आगे भी मजबूत रहने की संभावना जता रहे है। कंपनियां भी ग्राहकों की बदलती पसंद को देखते हुए इस सेगमेंट में नए मॉडल और अपडेटेड गाड़ियां ला रही हैं।
  • यानी भारतीय कार बाजार में अब सिर्फ सस्ती और छोटी कार ही प्राथमिकता नहीं रह गई है। बेहतर रोड प्रेजेंस, ज्यादा स्पेस, सुरक्षा फीचर्स और एसयूवी जैसा डिजाइन ग्राहकों के खरीदारी के फैसले में तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें