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सुप्रीम कोर्ट ने NHAI से पूछा: हाईवे पर खड़े वाहनों की तुरंत निगरानी के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम क्यों नहीं?

Tue, 06 Oct 2026 05:11 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नेशनल हाईवे पर अवैध और खतरनाक तरीके से खड़े वाहनों के कारण होने वाले जानलेवा हादसों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से सवाल किए। जानें पूरा मामला।
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Supreme Court - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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राष्ट्रीय राजमार्गों पर खड़े या पार्क किए गए वाहनों से होने वाले सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल किया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के पास ऐसा इलेक्ट्रॉनिक निगरानी तंत्र क्यों नहीं हो सकता, जिससे हाईवे पर खड़े किसी वाहन की तुरंत पहचान और निगरानी की जा सके। 

यह टिप्पणी राजस्थान के फलोदी में नवंबर 2025 में हुए सड़क हादसे से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान आई। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई थी। 

 

सुप्रीम कोर्ट ने NHAI से इलेक्ट्रॉनिक निगरानी को लेकर क्या पूछा?

  • जस्टिस विक्रम नाथ, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और संदीप मेहता की पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी एएनएस नाडकर्णी ने हाईवे पर वाहनों की पार्किंग से जुड़े कुछ हालिया सड़क हादसों का जिक्र किया।
  • इसके बाद पीठ ने सवाल किया कि NHAI के पास पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद ऐसा इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस सिस्टम क्यों नहीं हो सकता, जिससे हाईवे पर स्थिर या पार्क किए गए किसी वाहन की तुरंत पहचान की जा सके।
  • सुनवाई के दौरान एक वकील ने कोर्ट को बताया कि NHAI हाईवे पर पेट्रोलिंग करता है। 

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हाईवे पर अवैध पार्किंग को लेकर पहले भी क्या चिंता जता चुका है कोर्ट?

  • सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में इस मामले की सुनवाई के दौरान भी हाईवे पर अतिक्रमण और खड़े वाहनों का मुद्दा उठाया था।
  • उस समय NHAI की ओर से पेश वकील ने बताया था कि हाईवे पर अनधिकृत पार्किंग की जांच के लिए नियमित निरीक्षण और पेट्रोलिंग से संबंधित सर्कुलर जारी किए गए हैं।
  • वहीं, एमिकस क्यूरी ने कहा था कि हाईवे पर वाहनों की अवैध पार्किंग सड़क हादसों का एक प्रमुख कारण है।

 

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Vehicles parked on the Jammu-Srinagar National Highway in Anantnag - फोटो : PTI

यह मामला किस सड़क हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा?

 

हाईवे पर भारी वाहनों की पार्किंग को लेकर कोर्ट ने क्या निर्देश दिए थे?

 

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसों वाले क्षेत्रों की पहचान को लेकर क्या कहा?

कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और NHAI को दुर्घटना संभावित ब्लैकस्पॉट और महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान करने का निर्देश दिया था। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों पर मौजूद दुर्घटना ब्लैकस्पॉट की व्यापक सूची प्रकाशित करने को कहा गया था। 

कोर्ट ने अपने पहले के निर्देशों में इस बात पर भी चिंता जताई थी कि भारत की कुल सड़क लंबाई में राष्ट्रीय राजमार्गों की हिस्सेदारी करीब 2 प्रतिशत है। लेकिन देश में होने वाली कुल सड़क दुर्घटना मौतों में इनकी हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि खासकर तेज रफ्तार वाले एक्सप्रेसवे और हाईवे प्रशासनिक लापरवाही या बुनियादी ढांचे की कमियों के कारण खतरे का गलियारा नहीं बनने चाहिए।

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