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SC: भारी डीजल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए बनाएं नीति, सुप्रीम कोर्ट का सरकार को आदेश

Fri, 12 Jan 2024 06:11 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को छह महीने के भीतर एक नीति बनाने का निर्देश दिया है। जिसके तहत भारी डीजल वाहनों को हटाकर उनकी जगह बीएस VI वाहनों को लाया जाएगा। न्यायालय ने कहा कि स्वच्छ हवा का अधिकार सिर्फ दिल्ली में रहने वाले लोगों का नहीं है, बल्कि पूरे देश के लोगों का है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को छह महीने के भीतर एक नीति बनाने का निर्देश दिया है। जिसके तहत भारी डीजल वाहनों को हटाकर उनकी जगह बीएस VI वाहनों को लाया जाएगा। न्यायालय ने कहा कि स्वच्छ हवा का अधिकार सिर्फ दिल्ली में रहने वाले लोगों का नहीं है, बल्कि पूरे देश के लोगों का है।
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पीठ ने कहा, "प्रदूषण, विशेष रूप से वायु प्रदूषण, पिछले कुछ दशकों से चिंता का विषय रहा है। वायु प्रदूषण भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीधे प्रभावित करता है।

अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत जीवन के अधिकार में प्रदूषण-मुक्त वातावरण में रहने का अधिकार भी शामिल है। वायु प्रदूषण का मुद्दा हर नागरिक के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह नागरिकों के जीवन स्तर को प्रभावित करता है और उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है।"
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यह देखते हुए कि बीएस VI इंजन ट्रक और ट्रेलर स्वच्छ ईंधन पर चलते हैं, शीर्ष अदालत ने कहा कि वायु प्रदूषण का मुद्दा प्रत्येक नागरिक के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

शीर्ष अदालत ने केंद्र से पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण द्वारा की गई सिफारिशों की जांच करने के लिए कहा, जिसे दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए न्यायालय द्वारा ही स्थापित किया गया है।

न्यायमूर्ति अभय एस ओका की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की दो-न्यायाधीशों की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति पंकज मिथल भी शामिल थे, ने वायु गुणवत्ता के बढ़ते स्तर को ध्यान में रखते हुए और प्रदूषण पर नियंत्रण रखने के लिए कई निर्देश पारित किए। 
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ट्रक - फोटो : For Reference Only
पीठ ने केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भारी वाहनों के लिए सीएनजी, हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक सहित बेहतर तरीकों और साधनों की तलाश करने का निर्देश दिया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने मंत्रालयों को बेहतर विकल्प तलाशने का निर्देश दिया। क्योंकि दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक और प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा पाया गया।

न्यायालय ने कहा, "पिछले कुछ महीनों से इन क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 'बहुत अस्वस्थ' या 'खतरनाक' श्रेणी में रहा है।"

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण और वायु गुणवत्ता सूचकांक को ध्यान में रखते हुए चिंतित सर्वोच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की।

सर्वोच्च न्यायालय ने कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीसीआईएल) द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। अपील राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के 8 मार्च, 2019 के एक आदेश के खिलाफ थी। एनजीटी के आदेश में कहा गया था कि दिल्ली में तुगलकाबाद स्थित इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) में डीजल वाहनों को आना बंद कर देना चाहिए, और चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और सीएनजी वाहनों पर स्विच करना चाहिए।

एनजीटी के फैसले की आलोचना करते हुए, शीर्ष अदालत ने कहा कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में डीजल वाहनों को प्रतिबंधित करने में ट्रिब्यूनल के आदेश अनुचित और अनावश्यक थे। माने कि यहां रहने वाले लोग प्रदूषण मुक्त वातावरण के हकदार हैं, जबकि देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोग नहीं।
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