फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SC: 2,500 करोड़ रुपये के अटके सेस क्रेडिट का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने फाडा की याचिका पर केंद्र से मांगा जवाब

Sat, 14 Mar 2026 05:05 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) द्वारा दायर एक याचिका को स्वीकार कर लिया है। जिसमें 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के अटके हुए कंपनसेशन सेस क्रेडिट (अवरुद्ध क्षतिपूर्ति उपकर) के संबंध में राहत की मांग की गई है।
विज्ञापन
Car Showroom - फोटो : AI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने ऑटो डीलरों के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) (फाडा) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई स्वीकार कर ली है।

यह याचिका लगभग ₹2,500 करोड़ के मुआवजा उपकर (कंपनसेशन सेस) क्रेडिट से जुड़ी है। जो जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद उपयोग नहीं हो पा रहे हैं।

अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई 25 मार्च 2026 के लिए तय की है।

विज्ञापन

मामला किस मुद्दे से जुड़ा है?
यह मामला उन वाहनों की इन्वेंट्री से जुड़ा है जिन्हें डीलरों ने गुड्स एंड सर्विसेस टेक्स (GST) (जीएसटी) के नए ढांचे लागू होने से पहले खरीदा था।

उस समय वाहन खरीदते समय डीलरों को दो तरह के कर देने पड़ते थे:

  • जीएसटी

  • मुआवजा उपकर (कंपनसेशन सेस)

इन वाहनों पर चुकाए गए उपकर का क्रेडिट डीलरों के खातों में जमा हो गया था।

GST 2.0 लागू होने के बाद समस्या क्यों पैदा हुई?
जब जीएसटी 2.0 लागू किया गया, तो कई वाहन श्रेणियों पर कर ढांचे में बदलाव किया गया।

इसमें:

  • मुआवजा उपकर को खत्म कर दिया गया

  • कई वाहनों पर जीएसटी दरें कम कर दी गईं

इसके कारण डीलरों के पास जमा हुए उपकर क्रेडिट का उपयोग करना संभव नहीं रह गया।

कितनी राशि फंसी हुई बताई जा रही है?
फाडा के अनुसार देशभर के ऑटो डीलर नेटवर्क में लगभग ₹2,500 करोड़ से अधिक का मुआवजा उपकर क्रेडिट फंसा हुआ है।

यह राशि उन वाहनों से जुड़ी है जो पुराने कर ढांचे के तहत खरीदे गए थे। लेकिन नए कर ढांचे में उनकी बिक्री हुई।

इससे डीलरों पर क्या असर पड़ रहा है?
डीलर संगठन का कहना है कि इस स्थिति से कई ऑटो डीलरशिप पर वर्किंग कैपिटल का दबाव बढ़ गया है।

खासतौर पर छोटे और मध्यम व्यवसायों (MSME) के लिए यह वित्तीय चुनौती बन गई है। क्योंकि उनकी बड़ी रकम कर क्रेडिट के रूप में फंसी हुई है।

विज्ञापन

FADA ने सरकार से क्या मांग की है?
फाडा ने अदालत के माध्यम से सरकार से एक संक्रमणकालीन समाधान (ट्रांजिशनल मैकेनिज्म) की मांग की है।

इस प्रस्ताव के तहत डीलरों को अनुमति दी जाए कि वे अपने बचे हुए मुआवजा उपकर क्रेडिट को अन्य जीएसटी देनदारियों के लिए समायोजित कर सकें।

क्या डीलरों को मिलेगी राहत?
ऑटो डीलर संघ का कहना है कि यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो इससे डीलर नेटवर्क पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और सरकार की प्रतिक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि डीलरों को राहत मिलती है या नहीं।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें