मामला किस मुद्दे से जुड़ा है?
यह मामला उन वाहनों की इन्वेंट्री से जुड़ा है जिन्हें डीलरों ने गुड्स एंड सर्विसेस टेक्स (GST) (जीएसटी) के नए ढांचे लागू होने से पहले खरीदा था।
उस समय वाहन खरीदते समय डीलरों को दो तरह के कर देने पड़ते थे:
इन वाहनों पर चुकाए गए उपकर का क्रेडिट डीलरों के खातों में जमा हो गया था।
GST 2.0 लागू होने के बाद समस्या क्यों पैदा हुई?
जब जीएसटी 2.0 लागू किया गया, तो कई वाहन श्रेणियों पर कर ढांचे में बदलाव किया गया।
इसमें:
इसके कारण डीलरों के पास जमा हुए उपकर क्रेडिट का उपयोग करना संभव नहीं रह गया।
कितनी राशि फंसी हुई बताई जा रही है?
फाडा के अनुसार देशभर के ऑटो डीलर नेटवर्क में लगभग ₹2,500 करोड़ से अधिक का मुआवजा उपकर क्रेडिट फंसा हुआ है।
यह राशि उन वाहनों से जुड़ी है जो पुराने कर ढांचे के तहत खरीदे गए थे। लेकिन नए कर ढांचे में उनकी बिक्री हुई।
इससे डीलरों पर क्या असर पड़ रहा है?
डीलर संगठन का कहना है कि इस स्थिति से कई ऑटो डीलरशिप पर वर्किंग कैपिटल का दबाव बढ़ गया है।
खासतौर पर छोटे और मध्यम व्यवसायों (MSME) के लिए यह वित्तीय चुनौती बन गई है। क्योंकि उनकी बड़ी रकम कर क्रेडिट के रूप में फंसी हुई है।
FADA ने सरकार से क्या मांग की है?
फाडा ने अदालत के माध्यम से सरकार से एक संक्रमणकालीन समाधान (ट्रांजिशनल मैकेनिज्म) की मांग की है।
इस प्रस्ताव के तहत डीलरों को अनुमति दी जाए कि वे अपने बचे हुए मुआवजा उपकर क्रेडिट को अन्य जीएसटी देनदारियों के लिए समायोजित कर सकें।
क्या डीलरों को मिलेगी राहत?
ऑटो डीलर संघ का कहना है कि यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो इससे डीलर नेटवर्क पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और सरकार की प्रतिक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि डीलरों को राहत मिलती है या नहीं।