फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

RTO Scam: राजस्थान ट्रांसपोर्ट विभाग में ₹600 करोड़ का फर्जी नंबर घोटाला, जानें क्या है ‘घोस्ट रजिस्ट्रेशन’

Sat, 14 Mar 2026 04:17 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कहा जाता है कि सही मकसद के लिए इस्तेमाल की गई बुद्धिमत्ता से सभी को फायदा हो सकता है। लेकिन राजस्थान में कथित तौर पर इसका इस्तेमाल एक बड़े पैमाने पर किए गए ऐसे फ़्रॉड के लिए किया गया। जिसने राज्य के परिवहन विभाग को हिलाकर रख दिया है।
विज्ञापन
Rajasthan RTO Scam - फोटो : AI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजस्थान में वाहन पंजीकरण से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने राज्य के परिवहन विभाग को हिला कर रख दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह कथित घोटाला लगभग 600 करोड़ रुपये का है।

इस मामले में आरोप है कि कुछ आरटीओ अधिकारियों और बिचौलियों के नेटवर्क ने पुराने या कबाड़ हो चुके वाहनों के दुर्लभ रजिस्ट्रेशन नंबर नए वाहनों को अवैध रूप से आवंटित कर दिए। इन नंबरों को लाखों रुपये में बेचा जाता था।

जांचकर्ताओं का कहना है कि इस पूरे रैकेट के जरिए मोटी कमाई की गई, खासकर उन लोगों से जो विशेष या कम अंकों वाले वीआईपी नंबर चाहते थे।

विज्ञापन

किन जिलों में सामने आईं गड़बड़ियां?
यह कथित घोटाला राजस्थान के कई जिलों में सामने आया है। जांच में जिन स्थानों पर अनियमितताएं पाई गईं उनमें शामिल हैं:

  • जयपुर
  • झुंझुनूं
  • सलूम्बर
  • सवाई माधोपुर
  • दौसा

एक मामले में ही 650 से अधिक पुराने "विंटेज" रजिस्ट्रेशन नंबरों को नए वाहनों के नाम पर ट्रांसफर कर दिया गया।

'घोस्ट रजिस्ट्रेशन' क्या होता है?
जांच अधिकारियों के मुताबिक दलालों ने ऐसे वाहन रजिस्ट्रेशन नंबरों को निशाना बनाया जो या तो रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं थे या जिनके दस्तावेज गुम या नष्ट बताए गए थे।

इन नंबरों को “घोस्ट रजिस्ट्रेशन” कहा जा रहा है।

आरोप है कि अंदरूनी मिलीभगत से इन निष्क्रिय नंबरों को सरकारी वाहन डेटाबेस VAHAN पर फिर से सक्रिय किया गया। और बाद में उन्हें नए वाहनों, खासकर महंगी कारों, को आवंटित कर दिया गया।

यह घोटाला सामने कैसे आया?
यह मामला पहली बार मार्च 2025 में सामने आया जब पुराने और दुर्लभ रजिस्ट्रेशन नंबरों के लेनदेन में अचानक तेजी देखी गई।

जांच में पाया गया कि कई नंबर ऐसे वाहनों से जुड़े थे जो पहले ही कबाड़ हो चुके थे, छोड़े जा चुके थे या कई दशक पहले ग्रामीण क्षेत्रों में पंजीकृत किए गए थे।

दलालों ने कथित तौर पर इन पुराने आवेदनों को फिर से सक्रिय कर बिना निर्धारित नीलामी प्रक्रिया के नंबर नए वाहनों को दे दिए।

एक नंबर के लिए कितनी रकम ली जाती थी?
जांच में सामने आया कि एक विशेष रजिस्ट्रेशन नंबर के लिए लगभग 4 से 5 लाख रुपये तक वसूले जाते थे।

जबकि शुरुआत में ऐसे नंबर केवल लगभग 21,000 रुपये में जारी किए गए थे।

यही कारण है कि यह रैकेट बेहद लाभदायक बन गया और कई वर्षों तक चलता रहा।

पहली एफआईआर कब दर्ज हुई?
पहला आधिकारिक मामला जयपुर में सामने आया।

31 मार्च 2025 को गांधी नगर पुलिस स्टेशन जयपुर में एफआईआर दर्ज की गई, जिसके बाद पूरे राज्य में जांच का दायरा बढ़ाया गया।

बाद में जयपुर आरटीओ ने संदिग्ध विंटेज नंबर वाले 2,000 से अधिक वाहन मालिकों को नोटिस जारी किए। 

संदिग्ध वाहनों पर क्या कार्रवाई की गई?
परिवहन विभाग ने ऐसे वाहनों के रजिस्ट्रेशन को "लेन-देन न किया जाए" श्रेणी में डाल दिया।

इसका मतलब है कि इन वाहनों पर निम्न सेवाएं फिलहाल रोक दी गईं:

  • वाहन बिक्री या ट्रांसफर

  • रजिस्ट्रेशन से जुड़े अन्य सरकारी काम

दिसंबर 2025 में इन रजिस्ट्रेशन नंबरों की जांच के लिए विशेष सत्यापन शिविर भी आयोजित किए गए।

क्या इस मामले में ED भी शामिल हुई?
जांच के दौरान बड़े वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय भी जांच में शामिल हो गई।

एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत दस्तावेज मांगे और पैसे के लेनदेन की जांच शुरू की।

प्रारंभिक जांच में अनुमान लगाया गया कि 2018 से 2023 के बीच सरकारी खजाने को 500 से 600 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ हो सकता है।

क्या अधिकारियों पर कार्रवाई हुई?
इस मामले में कई अधिकारियों और एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

उदाहरण के लिए:

  • जगदीश अमरावत, जो दौसा में आरटीओ थे, उन्हें नवंबर 2025 में निलंबित कर दिया गया।

जयपुर में ही तीन अंकों वाले वीआईपी नंबरों के गलत आवंटन से जुड़े मामलों में पुलिस ने 39 लोगों को आरोपी बनाया।

विज्ञापन

सरकार ने इस पर क्या कदम उठाए?
घोटाले के सामने आने के बाद परिवहन विभाग ने पूरे राज्य में पुराने या विंटेज रजिस्ट्रेशन नंबरों को दोबारा सक्रिय करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

साथ ही VAHAN पोर्टल पर डेटा एंट्री और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की निगरानी भी सख्त कर दी गई है।

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि किसी वाहन पर अवैध तरीके से आवंटित नंबर पाया गया, तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है।

डिजिटल सिस्टम में मौजूद खामियां!
राजस्थान का यह कथित घोटाला दिखाता है कि डिजिटल सिस्टम में मौजूद छोटी खामियां भी बड़े वित्तीय अपराध का कारण बन सकती हैं।

जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क का पता लगाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने में जुटी हैं। ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सके। 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें