दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने कहा कि अफ्रीका की सबसे औद्योगिक अर्थव्यवस्था अपने ऑटोमोटिव उद्योग में बदलाव कर रही है। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को बढ़ावा देने के लिए उपभोक्ताओं के लिए टैक्स छूट या सब्सिडी शुरू करने पर विचार कर रहा है।
फोर्ड, फॉक्सवैगन, बीएमडब्ल्यू और टोयोटा जैसी वैश्विक वाहन निर्माता कंपनियां स्थानीय और यूरोपीय दोनों बाजारों के लिए दक्षिण अफ्रीका में कारें बनाती हैं। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ संयुक्त रूप से इस देश में बनाए गए वाहनों का 46 प्रतिशत उपभोग करते हैं।
रामफोसा ने गुरुवार को एक ऑटोमोटिव उद्योग सम्मेलन में कहा कि स्वच्छ और अधिक टिकाऊ ईंधन की ओर कदम, साथ ही प्रमुख बाजारों में कड़े नियमन, कुछ वैश्विक वाहन निर्माताओं पर इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड मॉडल की ओर रुख करने का दबाव डाल रहे हैं।
नतीजतन, दक्षिण अफ्रीका का ऑटोमोटिव उद्योग नई ऊर्जा वाहनों की मांग का लाभ उठाने के लिए खुद को तैयार कर रहा है।
रामफोसा ने कहा, "इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग में तेजी लाने के लिए निर्माताओं को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को टैक्स छूट या सब्सिडी देने पर भी विचार किया जाना चाहिए।"
वित्त मंत्री एनोच गोडोंगवाना ने फरवरी में अपने बजट में कहा था कि दक्षिण अफ्रीका में इलेक्ट्रिक कारों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार 1 मार्च, 2026 से नए निवेश के लिए छूट शुरू करेगी।
इससे उत्पादकों को पहले वर्ष में इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन-चालित वाहनों पर योग्य निवेश व्यय का 150 प्रतिशत दावा करने की अनुमति मिल जाएगी।
रामफोसा ने कहा कि सरकार तथाकथित नई ऊर्जा वाहनों पर व्यापक नीति दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रही है, "जो हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड जैसी वैकल्पिक तकनीकों को बाहर नहीं करते हैं।"
पिछले साल, व्यापार, उद्योग और प्रतिस्पर्धा मंत्री ने एक श्वेत पत्र प्रकाशित किया था। जिसमें ईवी को अपनाने का समर्थन करने के लिए सरकारी प्रोत्साहन और घरेलू बाजार में उत्पादित और बेचे जाने वाले वाहनों में बैटरी के लिए आयात शुल्क में अस्थायी कमी जैसे कदमों की रूपरेखा दी गई थी।
इस पत्र में दक्षिण अफ्रीका में बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी के उत्पादन और ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन सेल बाजार में वैल्यू चेन के विकास की भी वकालत की गई थी।
रामफोसा ने कहा, "हम नवीन ऊर्जा वाहनों के उत्पादन को बढ़ावा देने और उन्हें समर्थन देने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"