WTO सीमा तक बढ़ सकता है इंपोर्ट ड्यूटी
इंटरनेशनल ट्रेड एडमिनिस्ट्रेशन कमीशन के आयुक्त अयाबोंगा कावे ने संसद को बताया कि सरकार टैरिफ शेड्यूल में संशोधन पर विचार कर रही है। इसका मकसद आयात शुल्क को विश्व व्यापार संगठन (WTO) (डब्ल्यूटीओ) के 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' नियमों के तहत तय अधिकतम सीमा के अनुरूप लाना है।
उन्होंने कहा कि पूरी तरह बनी पैसेंजर गाड़ियों (CBU) पर डब्ल्यूटीओ के तहत अधिकतम टैरिफ 50 प्रतिशत तक की अनुमति है। जबकि फिलहाल दक्षिण अफ्रीका में यह शुल्क करीब 25 प्रतिशत है। वाहन कंपोनेंट्स पर भी मूल देश के आधार पर 10 से 12 प्रतिशत तक शुल्क बढ़ाने की गुंजाइश बताई गई है।
यह भी पढ़ें - EV Fire: वायरल ईवी आग की घटना के बाद EV मालिकों के लिए जरूरी गाइड, आग लगने से कैसे रखें अपनी गाड़ी सुरक्षित
BRICS साझेदारी के बावजूद कड़ा रुख
चीन, भारत और दक्षिण अफ्रीका, तीनों ही ब्रिक्स समूह के सदस्य हैं, जो आपसी व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। इसके बावजूद दक्षिण अफ्रीका आयातित वाहनों को लेकर सख्त कदम उठाने के संकेत दे रहा है।
चीन और भारत से आयात में तेज उछाल
आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में दक्षिण अफ्रीका के कुल वाहन आयात में चीन की हिस्सेदारी 53 प्रतिशत और भारत की 22 प्रतिशत रही। पिछले चार वर्षों में चीन से वाहनों का आयात 368 प्रतिशत तक बढ़ा है, जबकि भारत से आयात में 135 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
यह भी पढ़ें - India-EU FTA: टैरिफ कटौती से बाजार तक पहुंच, जानें टू-व्हीलर सेक्टर को कैसे फायदा देगा भारत-ईयू व्यापार समझौता
एंट्री-लेवल सेगमेंट में सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धा
सबसे ज्यादा दबाव एंट्री-लेवल यानी सस्ती गाड़ियों के सेगमेंट में देखा जा रहा है। कम कीमत वाली आयातित गाड़ियों के चलते घरेलू निर्माताओं के मुनाफे पर असर पड़ा है और प्रतिस्पर्धा तेज हुई है।
लग्जरी कारों पर एक्साइज ड्यूटी भी एजेंडे में
सरकार संभावित टैक्स उपायों को लेकर नेशनल ट्रेजरी से भी सलाह ले सकती है। इसमें नई लग्जरी कारों पर एक्साइज ड्यूटी लगाने और रिबेट क्रेडिट सर्टिफिकेट सिस्टम की समीक्षा जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
दक्षिण अफ्रीका का यह कदम घरेलू ऑटो उद्योग को संरक्षण देने की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है। अगर प्रस्तावित टैरिफ लागू होते हैं, तो चीन और भारत से वाहन निर्यात करने वाली कंपनियों के लिए अफ्रीकी बाजार में हालात चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
यह भी पढ़ें - Car Parking: पेड़ों के नीचे कार पार्क करने के छुपे हुए खतरे, जो आपको जरूर जानने चाहिए
यह भी पढ़ें - Car Driving Mistakes: कहीं आपकी ड्राइविंग आदतों के कारण तो नहीं घिस रहे कार ब्रेक? जानिए बचाव का सही तरीका