स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया ने लगभग 11,000 करोड़ रुपये (1.4 बिलियन डॉलर) के कस्टम ड्यूटी धोखाधड़ी के आरोप को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कंपनी पर आरोप है कि उसने पूरी तरह से नॉक डाउन (CKD) यूनिट्स के रूप में कारों के आयात में गड़बड़ी की है, जिससे कस्टम ड्यूटी से बचने की कोशिश की गई।
कंपनी का पक्ष
पीटीआई के मुताबिक, इस मामले पर जब स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो कंपनी ने कहा कि वह कानूनी रूप से उपलब्ध सभी उपायों का उपयोग कर रही है और इस नोटिस के खिलाफ उचित कार्यवाही करेगी।
कंपनी ने एक बयान में कहा, "स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया एक जिम्मेदार संगठन के रूप में कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है और सभी वैश्विक व स्थानीय कानूनों का पूर्ण रूप से पालन करती है।"
क्या है पूरा मामला?
कस्टम अधिकारियों ने स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया पर आरोप लगाया है कि उसने कारों के आयात को लेकर गलत जानकारी दी और कस्टम ड्यूटी में छूट का अनुचित लाभ उठाया। आरोप के मुताबिक, यह धोखाधड़ी उन कारों को लेकर की गई जो पूरी तरह से नॉक डाउन (CKD) यूनिट के रूप में भारत में लाई गई थीं।
फॉक्सवैगन ग्रुप के तहत ऑडी, VW और स्कोडा जैसे ब्रांड आते हैं, जो CKD के रूप में कारों का आयात कर भारत में असेंबल करते हैं। इनमें ऑक्टाविया, सुपर्ब, कोडिएक, पसाट, जेटा और टिगुआन जैसी कारें शामिल हैं।
आरोप है कि कंपनी ने कार पार्ट्स को अलग-अलग यूनिट्स के रूप में आयात कर कस्टम ड्यूटी में बचत की, जबकि नियमों के अनुसार CKD यूनिट्स पर ज्यादा आयात शुल्क लागू होता है।
फॉक्सवैगन ग्रुप की भारत में रणनीति
वर्ष 2019 में फॉक्सवैगन ग्रुप इंडिया ने अपने तीन पैसेंजर कार सब्सिडियरी कंपनियों को स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया में विलय करने की मंजूरी ली थी। इस कदम का मकसद बेहतर समन्वय स्थापित करना और 2025 तक भारतीय बाजार में स्कोडा व फॉक्सवैगन की हिस्सेदारी बढ़ाना था।
इसके अलावा, जुलाई 2018 में फॉक्सवैगन ग्रुप ने इंडिया 2.0 प्रोजेक्ट के तहत 1 बिलियन यूरो का निवेश करने की घोषणा की थी।