केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए एक समान टोल नीति पर काम कर रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत की हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर अब अमेरिका के बराबर पहुंच चुकी है।
गडकरी ने PTI को एक साक्षात्कार में बताया, "हम एक समान टोल नीति पर काम कर रहे हैं। इससे यात्रियों को हो रही परेशानियों का समाधान होगा।" हालांकि, उन्होंने इस नीति के बारे में अधिक जानकारी साझा नहीं की।
टोल बढ़ने से लोगों में असंतोष
राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल शुल्क बढ़ने और खराब सड़क सुविधाओं के कारण आम जनता में असंतोष बढ़ रहा है। इसपर पूछे गए एक सवाल में गडकरी ने कहा कि मंत्रालय यात्रियों की शिकायतों को गंभीरता से ले रहा है और सोशल मीडिया पर मिलने वाली शिकायतों के आधार पर टोल ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
पिछले 10 वर्षों में टोलिंग सिस्टम के तहत कई नए मार्गों को शामिल किया गया है, जिससे टोल दरों में लगातार वृद्धि हुई है। सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए बैरियर-रहित ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) आधारित टोल संग्रह प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है।
टोल संग्रह में बड़ा इजाफा
वित्त वर्ष 2023-24 में टोल संग्रह ₹64,809.86 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 35% अधिक है।
2019-20 में यह संग्रह ₹27,503 करोड़ था, जो अब लगभग दोगुना से भी ज्यादा है।
वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्गों पर निजी कारों की हिस्सेदारी लगभग 60% है, लेकिन टोल संग्रह में इनका योगदान सिर्फ 20-26% ही है।
हाईवे निर्माण की रफ्तार होगी तेज
गडकरी ने कहा कि 2020-21 में प्रति दिन 37 किलोमीटर हाईवे निर्माण का रिकॉर्ड बना था, जिसे इस वित्तीय वर्ष में तोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
अब तक 7,000 किमी हाईवे बनाए जा चुके हैं और फरवरी-मार्च में निर्माण की रफ्तार और बढ़ने की उम्मीद है।
पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की स्थिति:
2020-21: 13,435.4 किमी
2021-22: 10,457.2 किमी
2022-23: 10,331 किमी
2023-24: 12,349 किमी
इसके अलावा, इस वित्त वर्ष में 13,000 किमी नए हाईवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने की योजना है।
भारत माला परियोजना के तहत प्रोजेक्ट्स को मंजूरी में देरी
गडकरी ने बताया कि भारत माला परियोजना के तहत मंत्रालय को ₹3,000 करोड़ तक के हाईवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने का अधिकार था, लेकिन अब मंत्रालय ₹1,000 करोड़ से अधिक की किसी भी परियोजना के लिए कैबिनेट की मंजूरी लेने के लिए बाध्य है।
उन्होंने कहा, "हमने ₹50,000-₹60,000 करोड़ के हाईवे प्रोजेक्ट्स की मंजूरी के लिए कैबिनेट को प्रस्ताव भेजा है। जैसे ही मंजूरी मिलेगी, हम उन पर काम शुरू कर देंगे।"
एक अंतर-मंत्रालयी पैनल ने सुझाव दिया है कि कोई भी हाईवे प्रोजेक्ट तभी मंजूर किया जाए, जब 90% भूमि अधिग्रहण का काम पूरा हो जाए और पर्यावरण जैसी सभी कानूनी मामलों में अनुमती मिल जाए।