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Second Hand Superbike: खरीद रहे हैं पुरानी सुपरबाइक? तो इन बातों को न करें नजरअंदाज, रहेंगे फायदे में

Sat, 22 Feb 2025 07:20 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अगर आप सेकंड-हैंड सुपरबाइक खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह काम थोड़ा पेचीदा हो सकता है। लेकिन सही जानकारी और सतर्कता से आप एक अच्छी डील पा सकते हैं। आइए जानते हैं कि पुरानी सुपरबाइक खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। 
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BMW S 1000 RR - फोटो : BMW Motorrad
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विस्तार
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अगर आप सेकंड-हैंड सुपरबाइक खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह काम थोड़ा पेचीदा हो सकता है। कई लोग पुरानी बाइक लेने से बचते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं उन्हें कोई समस्या वाली बाइक न मिल जाए, जो लगातार पैसा और समय खपत करे। लेकिन सही जानकारी और सतर्कता से आप एक अच्छी डील पा सकते हैं। आइए जानते हैं कि पुरानी सुपरबाइक खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। 
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1. खतरे की घंटी को पहचानें
कोई भी पुरानी बाइक खरीदने से पहले कुछ संकेतों पर ध्यान दें:
  • बाइक को खुद देखें: सिर्फ फोटो देखकर फैसला न लें, बाइक को सामने से देखें और जांचें।
  • कागजात चेक करें: बाइक के दस्तावेज, जैसे रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), इंश्योरेंस और मालिकों की संख्या चेक करें।
  • बाइक की स्थिति जांचें:
  1. टायर की कंडीशन ठीक है या घिस चुके हैं?
  2. बॉडी पैनल और प्लास्टिक कहीं से टूटे या रिपेयर किए गए तो नहीं?
  3. ब्रेक और क्लच लीवर, हैंडलबार के किनारे कहीं ज्यादा घिसे हुए तो नहीं दिख रहे?
  • अजीब लगे तो पूछें: अगर कुछ भी असामान्य लगे, तो विक्रेता से सवाल पूछें। अगर वह टाल-मटोल करे या कोई जानकारी छिपाए, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है।
  • बकाया चालान या अन्य लंबित शुल्क: बाइक के रजिस्ट्रेशन नंबर से ऑनलाइन चेक करें कि कहीं उस पर कोई लंबित फाइन या केस तो नहीं है। अगर मामूली पेंडिंग चार्ज हैं, तो विक्रेता से कहें कि वह उन्हें पहले क्लियर कर दे।
  • इंजन की जांच करें: इंजन से गैसकेट लीक हो रही है या कोई तेल का रिसाव दिख रहा है तो सतर्क रहें। एक अच्छी तरह मेंटेन की गई बाइक आमतौर पर साफ-सुथरी और चमकती हुई दिखेगी।

2. सर्विस रिकॉर्ड्स जरूर चेक करें
कई विक्रेता कह सकते हैं कि बाइक को नियमित रूप से मेंटेन रखा गया है या हाल ही में सर्विस कराई गई है। लेकिन बिना सबूत के इस पर भरोसा न करें।
  • सर्विस हिस्ट्री मांगें: एक ईमानदार विक्रेता के पास सर्विस की पूरी जानकारी होगी, चाहे वह कंपनी से हो या बाहर के मैकेनिक से।
  • डीलरशिप से पुष्टि करें: अगर विक्रेता सर्विस रिकॉर्ड देने में हिचकिचाए, तो कंपनी के आधिकारिक सर्विस सेंटर से बाइक की सर्विस हिस्ट्री की जानकारी लें।

3. बाइक की मैकेनिकल जांच करें
  • अगर आपको बाइक के मैकेनिकल पार्ट्स की अच्छी जानकारी है, तो स्वयं जांच करें।
  • अगर ऐसा नहीं है, तो अपने भरोसेमंद मैकेनिक को साथ लेकर जाएं।
  • कोई दोस्त या जानकार जो सुपरबाइक की समझ रखता हो, उसे भी साथ ले जा सकते हैं।
  • टेस्ट राइड जरूर लें: अगर विक्रेता टेस्ट राइड देने से मना करता है, तो यह एक खतरे की बड़ी घंटी है। ऐसी स्थिति में डील को छोड़ देना ही बेहतर होगा।
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4. फाइनल स्टेप – डील को सही तरीके से फाइनल करें
  • सभी दस्तावेज सही हों तो डील फाइनल करें।
  • बाइक की ओनरशिप अपने नाम पर ट्रांसफर करवाना न भूलें।

अगर आप इन बातों का ध्यान रखते हैं, तो सेकंड-हैंड सुपरबाइक खरीदने का अनुभव न सिर्फ सुरक्षित बल्कि फायदेमंद भी रहेगा। 
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