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Traffic Lights: सेल्फ-ड्राइविंग वाहनों के लिए ट्रैफिक लाइट में जल्द ही शामिल हो सकता है नया रंग! जानें प्लान

Tue, 13 Aug 2024 08:06 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ट्रैफिक लाइटें एक सदी से ज्यादा समय से सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक मैनेजमेंट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। जिसमें लाल, पीला और हरा रंग दुनियाभर में मान्यता प्राप्त हैं।हालांकि, टेक्नोलॉजी के विकास और ऑटोनॉमस व्हीकल्स के बढ़ते प्रभाव के साथ, वैज्ञानिक अब ट्रैफिक लाइटों में चौथे रंग - एक "सफेद रंग" - को शामिल करने का प्रस्ताव कर रहे हैं।
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Traffic Light - फोटो : Freepik
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विस्तार
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ट्रैफिक लाइटें एक सदी से ज्यादा समय से सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक मैनेजमेंट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। जिसमें लाल, पीला और हरा रंग दुनियाभर में मान्यता प्राप्त हैं। इन रंगों ने दुनिया भर के ड्राइवरों का मार्गदर्शन किया है। जिससे ट्रैफिक का फ्लो तय होता है और दुर्घटनाओं को कम किया जाता है। हालांकि, टेक्नोलॉजी के विकास और ऑटोनॉमस व्हीकल्स (एवी) के बढ़ते प्रभाव के साथ, वैज्ञानिक अब ट्रैफिक लाइटों में चौथे रंग - एक "सफेद रंग" - को शामिल करने का प्रस्ताव कर रहे हैं। जिसे विशेष रूप से सेल्फ-ड्राइविंग कारों और मानव ड्राइवरों के बीच बातचीत बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है।
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ऑटोनॉमस वाहनों का उदय
ऑटोनॉमस वाहन परिवहन में एक क्रांतिकारी बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि पूरी तरह से ड्राइवर रहित कारें अभी व्यापक नहीं हैं, लेकिन तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है। कैलिफोर्निया और एरिजोना में काम करने वाली वेमो जैसी कंपनियां लगभग लेवल 5 ऑटोनॉमस हासिल कर चुकी हैं। जो सोसाइटी ऑफ ऑटोमोटिव इंजीनियर्स (एसएई) द्वारा परिभाषित उच्चतम स्तर है। यह लेवल बताता है कि एक वाहन मानव हस्तक्षेप के बिना किसी भी वातावरण में ड्राइविंग के सभी पहलुओं को संभाल सकता है।

टेस्ला, अन्य निर्माताओं के बीच, एवी टेक्नोलॉजी में भी महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है। यूके में, जबकि पूरी तरह से ऑटोनॉमस कारें फिलहाल प्रतिबंधित हैं, ऑटोनॉमस वाहन अधिनियम 2026 की शुरुआत में उनके व्यापक इस्तेमाल का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। यह एक ऐसे भविष्य के लिए मंच तैयार करता है जहां स्वायत्त और मानव-चालित दोनों वाहन सड़कों को साझा करेंगे। जिससे सवाल उठता है कि ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (यातायात प्रबंधन प्रणाली) इस नई वास्तविकता के अनुकूल कैसे हो सकती है।

क्या है "सफेद लाइट" का कॉन्सेप्ट
जहां एवी और पारंपरिक वाहन एक साथ सड़कों पर हैं, इस मिश्रित यातायात स्थितियों द्वारा पैदा हुई चुनौतियों का समाधान करने के लिए, नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों ने ट्रैफिक सिग्नल में "सफेद लाइट" की शुरूआत का प्रस्ताव किया है। इस सफेद रोशनी का प्राथमिक मकसद स्वायत्त वाहनों की एडवांस्ड कम्प्यूटेशनल क्षमताओं का लाभ उठाकर यातायात प्रवाह को बढ़ाना है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. अली हाजबाबी बताते हैं कि सफेद लाइट मानव ड्राइवरों के लिए उनके सामने वाले एवी का अनुसरण करने के संकेत के रूप में काम करेगा। पारंपरिक लाल, पीला और हरा लाइट अपने मौजूदा अर्थों को बनाए रखेगा। यानी रुकने के लिए लाल, सावधानी के लिए पीला और जाने के लिए हरा। हालांकि, सफेद लाइट एक संकेत के रूप में काम करेगा कि एवी चौराहे पर नियंत्रण में हैं, मानव ड्राइवरों को उनके नेतृत्व का पालन करने का निर्देश देते हैं।

सफेद लाइट सिस्टम कैसे काम करती है
प्रस्तावित प्रणाली एवी की एक दूसरे के साथ और ट्रैफिक सिग्नल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ वायरलेस रूप से संवाद करने की क्षमता पर निर्भर करती है। जब पर्याप्त संख्या में एवी एक चौराहे पर पहुंचते हैं, तो सफेद लाइट एक्टिव हो जाएगा। यह संकेत देते हुए कि एवी ट्रैफिक के प्रवाह को प्रबंधित करने के लिए अपने मूवमेंट को कोऑर्डिनेट कर रहे हैं। मानव ड्राइवरों को बस अपने सामने वाले एवी को फॉलो करने की जरूरत होगी। इस पर भरोसा करते हुए कि ऑटोनॉमस वाहन ट्रैफिक फ्लो को ऑप्टिमाइज (अनुकूलन) कर रहे हैं।

इस कॉन्सेप्ट की टेस्टिंग कई कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए की गई। जिसमें दिखाया गया कि सफेद लाइट सिस्टम यात्रा के समय, ईंधन दक्षता और चौराहों पर ओवरऑल सुरक्षा में काफी सुधार कर सकती है। जर्नल ऑफ कंप्यूटर-एडेड सिविल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि यह नई प्रणाली भविष्य में जहां एवी ज्यादा प्रचलित होंगे, वहां यातायात प्रबंधन को सुव्यवस्थित कर सकती है।

ट्रैफिक मैनेजमेंट का भविष्य
जबकि सफेद लाइट सिस्टम में वादा किया जा रहा है। लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पारंपरिक ट्रैफिक लाइटों का इस्तेमाल तब तक जारी रहेगा जब तक कि सड़क पर ज्यादातर वाहन ऑटोनॉमस नहीं हो जाते। नजदीकी भविष्य के लिए, चौराहे अभी भी लाल, पीले और हरे रंग की बत्तियों के साथ काम करेंगे, जैसा कि दशकों से करते आए हैं।
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हालांकि, जैसे-जैसे एवी को अपनाने की दर बढ़ती है, सफेद लाइट सिस्टम के फायदे ज्यादा स्पष्ट हो सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, डॉ. हाजबाबी के शोध से पता चलता है कि ऐसे परिदृश्य में जहां लगभग सभी वाहन स्वायत्त होते हैं, चौराहों पर देरी 25 प्रतिशत से ज्यादा कम हो सकती है। यहां तक कि सड़क पर एवी के कम प्रतिशत के साथ भी, सिस्टम अभी भी ट्रैफिक फ्लो में महत्वपूर्ण सुधार ला सकता है।

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