अगस्त के आदेश में संशोधन, दायरा हुआ स्पष्ट
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने 12 अगस्त को दिए गए अपने पुराने आदेश में संशोधन किया है। उस आदेश में 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों के खिलाफ किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी। अब अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यह राहत केवल उन्हीं वाहनों को मिलेगी, जो BS-IV या उससे ऊंचे मानकों पर खरे उतरते हैं।
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एमसी मेहता मामले में जारी हुईं नई दिशानिर्देश
यह आदेश लंबे समय से चल रहे एमसी मेहता वायु प्रदूषण मामले की सुनवाई के दौरान जारी किया गया। अदालत ने कहा कि अगस्त का आदेश वाहनों की उम्र के आधार पर कार्रवाई रोकने के लिए था, न कि उत्सर्जन मानकों की अनदेखी के लिए। ऐसे में अब BS-IV से नीचे के मानकों, यानी BS-III और उससे पुराने वाहनों पर नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है।
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बीएस-IV और नए वाहनों को राहत बरकरार
पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि BS-IV और उससे नए मानकों वाले वाहनों के मालिकों के खिलाफ केवल उम्र के आधार पर कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। यानी डीजल वाहन अगर 10 साल से पुराने हैं या पेट्रोल वाहन 15 साल से पुराने हैं, लेकिन वे BS-IV मानकों का पालन करते हैं, तो उन्हें फिलहाल राहत मिलेगी।
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सरकार की दलील, पुराने वाहन ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं
दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत से आग्रह किया था कि BS-III और उससे पुराने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति दी जाए। उन्होंने दलील दी कि पुराने वाहनों की उत्सर्जन क्षमता बेहद खराब होती है और वे प्रदूषण में असमान रूप से बड़ा योगदान देते हैं। इस दलील का समर्थन अमीकस क्यूरी के रूप में अदालत की सहायता कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने भी किया।
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बीएस मानकों की पृष्ठभूमि और पुराने आदेश
अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि BS-IV मानक 2010 में लागू किए गए थे और उससे पहले बने वाहन ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली श्रेणी में आते हैं। इससे पहले, 12 अगस्त को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली-एनसीआर में पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों के मालिकों को राहत दी थी और उनके खिलाफ कार्रवाई रोकने के निर्देश दिए थे।
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एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देश
यह मामला 29 अक्तूबर 2018 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से भी जुड़ा है, जिसमें राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देश को बरकरार रखा गया था। एनजीटी ने 26 नवंबर 2014 को आदेश दिया था कि 15 साल से पुराने सभी डीजल और पेट्रोल वाहनों को सड़क पर चलने की अनुमति न दी जाए और उल्लंघन पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत वाहन जब्त किए जाएं। यह आदेश दोपहिया से लेकर भारी वाहनों तक, सभी पर लागू था।
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दिल्ली सरकार की आपत्ति और नई मांग
दिल्ली सरकार ने उम्र के आधार पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सरकार ने दलील दी थी कि कई लोग मजबूरी में अपने पुराने वाहन बेचने को विवश हो जाते हैं, जबकि उनका उपयोग बेहद सीमित होता है। सरकार ने यह भी मांग की थी कि केंद्र सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा उम्र आधारित प्रतिबंधों और उत्सर्जन आधारित मानकों के वास्तविक पर्यावरणीय लाभों का विस्तृत अध्ययन कराया जाए।
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