यह प्रोजेक्ट कहां स्थापित किया जाएगा?
आंध्र प्रदेश सरकार के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में राज्य निवेश संवर्धन बोर्ड (SIPB) ने मंजूरी दे दी है:
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स्थान: यह प्लांट तिरुपति जिले के सत्यवेदु में स्थापित किया जाएगा। जो आंध्र प्रदेश-तमिलनाडु सीमा के पास स्थित है।
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भूमि आवंटन: सरकार ने सत्यवेदु मंडल के वनेल्लुरु और रल्लाकुप्पम गांवों में 267 एकड़ जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए आवंटित की है।
उत्पादन क्षमता और रोजगार पर क्या असर पड़ेगा?
इस नए प्लांट के शुरू होने से रॉयल एनफील्ड की ताकत और राज्य की अर्थव्यवस्था दोनों को बढ़ावा मिलेगा:
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बढ़ती क्षमता: इस सुविधा के शुरू होने से रॉयल एनफील्ड की उत्पादन क्षमता में करीब 9 लाख यूनिट्स का इजाफा होने की उम्मीद है।
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रोजगार के अवसर: सरकार का अनुमान है कि इस प्रोजेक्ट से लगभग 5,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी।
प्रोजेक्ट के विभिन्न चरण और टाइमलाइन क्या है?
इस परियोजना को दो चरणों में विकसित किया जाएगा:
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पहला चरण (2029 तक): इसमें एक समर्पित 'वेंडर पार्क' बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य कंपनी के सप्लायर इकोसिस्टम को आंध्र प्रदेश में लाना और एक ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित करना है।
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दूसरा चरण (2032 तक): इसके दूसरे चरण के कार्य 2032 तक पूरे होने की उम्मीद है।
राज्य सरकार का इस निवेश पर क्या कहना है?
आंध्र प्रदेश के आईटी और उद्योग मंत्री नारा लोकेश ने इस निवेश को राज्य की बड़ी उपलब्धि बताया है:
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उन्होंने कहा कि यह निवेश आंध्र प्रदेश को एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने के प्रयासों को दर्शाता है।
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उनके अनुसार, रॉयल एनफील्ड सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि विरासत और बेहतरीन कारीगरी का प्रतीक है।
यह प्रोजेक्ट न केवल राज्य के दक्षिणी क्षेत्र में औद्योगिक विकास को रफ्तार देगा। बल्कि मोबिलिटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के आंध्र प्रदेश के अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगा।