क्या 2025 में हालात पूरी तरह बेहतर रहे?
हालांकि लंबे समय में सुधार दिखा है, लेकिन 2025 में घायलों की संख्या में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
पैदल यात्रियों की सुरक्षा क्यों बनी हुई है सबसे बड़ी चिंता?
सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर की सबसे ज्यादा जरूरत है।
जैसे-जैसे मेट्रो नेटवर्क का विस्तार हो रहा है, वैसे-वैसे बड़ी संख्या में लोग लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए पैदल चलने को मजबूर हैं, जिससे जोखिम बढ़ता है।
2025 की सबसे बड़ी सड़क दुर्घटना कौन-सी थी?
पिछले साल की सबसे गंभीर दुर्घटनाओं में से एक भांडुप वेस्ट रेलवे स्टेशन के पास हुई।
बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) की एक बस रिवर्स करते समय पैदल यात्रियों को कुचल गई, जिसमें
‘ब्लैक स्पॉट’ पहचान से कैसे घटीं मौतें?
मुंबई ट्रैफिक पुलिस के संयुक्त आयुक्त अनिल कुंभारे के मुताबिक, "पैदल यात्री अक्सर सड़क हादसों में सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। हमने ऐसे 'ब्लैक स्पॉट' की पहचान और मैपिंग की है, जहां बार-बार दुर्घटनाएं होती थीं।"उन्होंने बताया कि अमर महल जंक्शन (पूर्वी उपनगर) सबसे खतरनाक इलाकों में से एक था।
बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के साथ मिलकर वहां ट्रैफिक इंजीनियरिंग में बदलाव किए गए, जिससे मौतों में कमी आई।
क्या नए इंफ्रास्ट्रक्चर से नए खतरे भी पैदा हो सकते हैं?
ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि जैसे-जैसे शहर में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे होते हैं, नए ब्लैक स्पॉट उभर सकते हैं।
ऐसे में
शराब पीकर गाड़ी चलाने पर क्या सख्ती हुई?
मिड-2025 से ट्रैफिक पुलिस ने शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना शुरू किया।
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अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच
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3,228 संज्ञेय मामले दर्ज किए गए
ये मामले भारतीय न्याय संहिता और मोटर वाहन अधिनियम के तहत दर्ज हुए।
सड़क सुरक्षा पर विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
विश्व संसाधन संस्थान भारत (WRI India) के ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट धवल आशर के अनुसार, "2015 की तुलना में मुंबई में सड़क हादसों में मौतों में बड़ी गिरावट आई है, लेकिन पैदल यात्रियों की मुश्किलें अब भी बनी हुई हैं। जब शहर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है, यह सही समय है कि 'जीरो रोड ट्रैफिक फेटैलिटी' का लक्ष्य तय किया जाए और सेफ सिस्टम अप्रोच अपनाई जाए।"
एक सकारात्मक संकेत
मुंबई में सड़क दुर्घटनाओं में मौतों का कम होना एक सकारात्मक संकेत है। लेकिन बढ़ती पैदल आवाजाही और नए इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ सुरक्षा उपायों को और मजबूत करना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही योजना और सख्त अमल से शहर को सड़क हादसों में शून्य मौतों के लक्ष्य की ओर ले जाया जा सकता है।