भारत में राइट-हैंड-ड्राइव की ऐतिहासिक शुरुआत
भारत में राइट-हैंड-ड्राइव व्यवस्था की जड़ें ब्रिटिश औपनिवेशिक दौर से जुड़ी हैं। 19वीं सदी के अंत में जब भारत में मोटर वाहन आए, तब ब्रिटेन में पहले से ही बाईं ओर चलने की परंपरा थी। यह परंपरा मध्यकालीन यूरोप से चली आ रही थी, जब घुड़सवार लोग सुरक्षा और सुविधा के लिए बाईं ओर चलते थे ताकि दायां हाथ स्वतंत्र रहे।
ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार के साथ यही ट्रैफिक सिस्टम उसके उपनिवेशों में भी लागू हुआ। भारत में सड़क डिजाइन, ट्रैफिक नियम और वाहन संरचना उसी ढांचे पर विकसित हुई और आजादी से पहले ही यह व्यवस्था देश की परिवहन प्रणाली में गहराई से समा चुकी थी।
यह भी पढ़ें - Budget Expectations: बजट से ईवी सेक्टर को बड़ी उम्मीदें, 2025 में ईवी बिक्री 77% बढ़ी, लेकिन चुनौतियां बरकरार
ऑटो उद्योग और निर्यात में भारत की बढ़त
समय के साथ भारत का यह फैसला आर्थिक ताकत में बदल गया। आज भारत राइट-हैंड-ड्राइव वाहनों के लिए दुनिया के सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग केंद्र में शामिल है। चूंकि करीब 75 देश RHD वाहनों की मांग करते हैं, भारत इन बाजारों के लिए पसंदीदा उत्पादन और निर्यात केंद्र बन गया है।
भारतीय और वैश्विक ऑटो कंपनियां भारत से यूके, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, जापान, थाईलैंड और कई अफ्रीकी-एशियाई देशों में वाहन निर्यात करती हैं। एक ही स्टीयरिंग स्टैंडर्ड पर फोकस होने से डिजाइन सरल रहता है, उत्पादन तेज होता है और लागत नियंत्रित रहती है।
यह भी पढ़ें - FASTag: एक फरवरी 2026 से फास्टैग का नया नियम, ड्राइवरों के लिए एनएचएआई की अहम गाइडलाइन
कम लागत, ज्यादा प्रतिस्पर्धा
RHD पर आधारित एकीकृत इकोसिस्टम से कंपनियों को डैशबोर्ड, स्टीयरिंग लेआउट या इंजन प्लेसमेंट बार-बार बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे मैन्युफैक्चरिंग लागत घटती है और भारतीय वाहन अंतरराष्ट्रीय बाजारों में किफायती व प्रतिस्पर्धी बने रहते हैं। इसके साथ-साथ, भारत में RHD-केंद्रित कुशल वर्कफोर्स और सप्लायर नेटवर्क भी विकसित हो चुका है।
औपनिवेशिक विरासत से रणनीतिक ताकत तक
जो व्यवस्था कभी औपनिवेशिक विरासत थी, वही आज भारत की औद्योगिक रणनीति की मजबूत नींव बन गई है। राइट-हैंड-ड्राइव सिस्टम भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ सहज रूप से मेल खाता है। सड़क सुरक्षा में परिचित ढांचे का लाभ देता है और वैश्विक ऑटोमोबाइल निर्यात में देश को ठोस बढ़त दिलाता है।
यह भी पढ़ें - National Highways: तमिलनाडु के राष्ट्रीय राजमार्गों में डिजाइन खामियों से इनकार, सरकार ने बताए NH सुरक्षा मानक