भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी किसी भी देश के लिए दीमक की तरह काम करती है। एक तरफ देश में सड़क दुर्घटनाओं के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, दूसरी ओर रिश्वतखोरी इसे और भी गंभीर बना रही है। देश में ट्रैफिक नियमों को सख्ती से लागू करवाना कितना मुश्किल है, इसकी झलक इस रिपोर्ट में मिलती है।
लगभग 140 करोड़ की आबादी वाले देश भारत में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और सड़क हादसों के बढ़ते मामले चुनौती बन कर उभर रहे हैं। 2022 के आंकड़ों को देखें तो देश में सड़क हादसों में कुल 1,68,491 लोगों की मौत हुई थी। यह आंकड़े दुनिया के किसी और देश की तुलना में सबसे ज्यादा हैं। लिहाजा भारत की सड़कें दुनिया के सबसे खतरनाक सड़कों में गिनी जाने लगी हैं। सड़क हादसों को रोकने के लिए देश में ट्रैफिक नियमों को सख्ती से लागू करवाना सरकार के लिए चुनौती बनती जा रही है। देश में आम जनता के साथ-साथ प्रशासन की लापरवाही भी ट्रैफिक नियमों को सख्ती से लागू करवाने में अवरोध पैदा कर रहा है।
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कार्स24 ने 1,000 लोगों पर किए गए एक सर्वे की रिपोर्ट पेश की है जिसमें किए गए खुलासे चौंकाने वाले हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2024 में देश में कुल 8 करोड़ चालान जारी किए गए, जिनकी कुल देनदारी 12,000 करोड़ रुपये थी। इनमें से लगभग 75% चालान का भुगतान लोगों ने अभी तक नहीं किया है। यानी करीब 9,000 करोड़ रुपये के चालान पेंडिंग हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह राशि इतनी बड़ी है कि कई देशों की जीडीपी से भी अधिक है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इनमें से 55% चालान चारपहिया वाहनों पर है, जबकि दोपहिया वाहनों पर 45% चालान काटे गए हैं।
ट्रैफिक नियम
- फोटो : अमर उजाला
इन मामलों कटते हैं सबसे ज्यादा चालान
रिपोर्ट में बताया गया है कि सख्त ट्रैफिक नियमों के होने के बावजूद लोग मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। देश की सड़कों पर ओवरस्पीडिंग (अधिक स्पीड में गाड़ी चलाना) एक बड़ी समस्या बन चुकी है। भारत में 49% चालान ओवरस्पीडिंग के लिए काटे गए हैं। वही, 19% चालान सीट बेलिट न लगाने और हेलमेट न पहनने के जुर्म में काटे गए। वहीं, गलत तरीके से पार्किंग करने और रास्ता रोकने के मामले में 14% चालान किए गए हैं, जबकि 18% चालान सिग्नल जंपिंग और गलत साइड में गाड़ी चलाने के जुर्म में काटे गए हैं।
CCTV कैमरा
- फोटो : Adobe Stock
डर से करते हैं नियमों का पालन
इसमें कोई हैरानी की बात नहीं होगी कि भारत में लोग सुरक्षित रहने के लिए नहीं, बल्कि चालान के डर से नियमों का पालन करते हैं। यही वजह है कि भारत में सड़क हादसों के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस सर्वे में शामिल 47 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि कहीं CCTV कैमरा लगा है या नहीं, वे अपनी ड्राइविंग की आदत कभी नहीं बदलते। वहीं, 37% लोगों ने कहा कि वे सिर्फ कैमरों और पुलिस को देखकर स्पीड कम कर देते हैं। वहीं, 15% लोगों ने माना कि चालान के बचने के लिए वे सिर्फ स्पीड डिटेक्शन कैमरों के सामने स्पीड कम करते हैं, जबकि अन्य CCTV कैमरों को वे नजरअंदाज कर देते हैं।
54 फीसदी लोग देतें हैं रिश्वत (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : AI
चालान से बचने के लिए देते हैं रिश्वत
इस सर्वे रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि देश में रिश्वतखोरी ट्रैफिक व्यवस्था को किस तरह नुकसान पहुंचा रही है। डेटा और सर्वे रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में 54 फीसदी लोग ऐसे हैं, जो ट्रैफिक चालान से बचने के लिए रिश्वत यानी चाय-पानी का खर्च पुलिस को देते हैं या फिर उन्होंने चालान से बचने के लिए कम से कम एक बार पुलिस को रिश्वत जरूर दी है। इसके उलट सिर्फ 29 फीसदी लोग ही ऐसे हैं, जो सही तरीके से चालान भरते हैं।