Stephane Deblaise, CEO, Renault Group India at the launch of Renault Duster Strong Hybrid E-Tech 160
- फोटो : Renault India
कितना माइलेज और कितनी रेंज देगी नई Duster Hybrid?
रेनो का दावा है कि Duster Strong Hybrid शहर में होने वाली 80 प्रतिशत ड्राइविंग इलेक्ट्रिक मोड में कर सकती है। कंपनी ने इसकी कुल ड्राइविंग रेंज 1,400 किलोमीटर तक बताई है। वहीं, इसकी ARAI-प्रमाणित फ्यूल एफिशिएंसी 29 किमी प्रति घंटा है।
ये आंकड़े कंपनी के दावे हैं। वास्तविक माइलेज और रेंज ड्राइविंग की परिस्थितियों, ट्रैफिक और इस्तेमाल के तरीके के अनुसार अलग हो सकते हैं।
क्या Duster Strong Hybrid का माइलेज अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वियों से ज्यादा है?
रेनो का दावा है कि Duster E-Tech 160 को ARAI द्वारा 29 किमी/लीटर (kmpl) का सर्टिफाइड फ्यूल एफिशिएंसी माइलेज मिला है। जो इसे स्ट्रांग-हाइब्रिड मिड-साइज एसयूवी सेगमेंट में सबसे किफायती गाड़ियों में से एक बनाता है।
मिड-साइज हाइब्रिड एसयूवी माइलेज तुलना:
| एसयूवी मॉडल |
पावरट्रेन |
दावा किया गया माइलेज (ARAI) |
| Renault Duster Strong Hybrid |
1.8L ई-टेक हाइब्रिड |
29.00 kmpl |
| Maruti Suzuki Victoris |
स्ट्रांग-हाइब्रिड |
28.65 kmpl |
| Maruti Suzuki Grand Vitara |
स्ट्रांग-हाइब्रिड |
27.97 kmpl |
| Toyota Urban Cruiser Hyryder |
स्ट्रांग-हाइब्रिड |
27.97 kmpl |
नोट: हालांकि कागजों पर डस्टर हाइब्रिड अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे दिखती है। लेकिन वास्तविक दुनिया में माइलेज ट्रैफिक, ड्राइविंग स्टाइल और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। यह पावरट्रेन डीजल एसयूवी का एक बेहतरीन विकल्प बनने का दावा पेश करता है।
किन हाइब्रिड एसयूवी से होगा Duster का मुकाबला?
- Duster Strong Hybrid मिड-साइज एसयूवी सेगमेंट में चौथा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड विकल्प बनेगी। इस श्रेणी में इसका मुकाबला टोयोटा अर्बन क्रूजर हाइराइडर, मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा और मारुति सुजुकी विक्टोरिस से होगा।
- इस तरह रेनो की नई एसयूवी उन ग्राहकों को लक्ष्य करेगी जो मिड-साइज एसयूवी के साथ पेट्रोल और इलेक्ट्रिक पावर के कंबिनेशन का विकल्प चाहते हैं।
भारत के लिए Renault की आगे क्या योजना है?
रेनो ने भारत को वैश्विक स्तर पर अपने शीर्ष तीन बाजारों में शामिल करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी अपनी ‘futuREady’ रणनीतिक योजना के तहत भारत में सात उत्पादों की लाइनअप तैयार करना चाहती है, ताकि बाजार में अपनी हिस्सेदारी दोबारा बढ़ा सके।
इसके अलावा, कंपनी भारत में अपनी उत्पाद इंजीनियरिंग क्षमताओं को और विकसित करने तथा 2030 तक निर्यात कारोबार को 2 अरब पाउंड तक पहुंचाने की योजना पर भी काम कर रही है।