भारत सरकार पिछले कई वर्षों से वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा दे रही है ताकि कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के आयात को कम किया जा सके और वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। इसी के तहत, सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मात्रा बढ़ाने पर जोर दे रही है। इस दिशा में अगला बड़ा कदम E20 फ्यूल होगा, यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल, जिसे अक्तूबर 2025 तक पूरे देश में लागू किया जाएगा।
तेल भरवाते समय इन बातों का रखें ध्यान
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एथेनॉल मिश्रण में तेजी से बढ़ोतरी
इंडिया एनर्जी वीक 2025 के उद्घाटन सत्र को वर्चुअली संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को तय समय पर पूरा करने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
क्या है मौजूदा स्थिति
भारत में इस समय पेट्रोल में 19% एथेनॉल मिलाया जा रहा है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत, किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी, और CO₂ उत्सर्जन में कमी हो रही है। पहले, सरकार ने 2030 तक 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा था, लेकिन बाद में इसे 2025-26 के लिए तय कर दिया गया।
Tata Punch Flex Fuel
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1 अप्रैल 2025 से नए वाहनों में बदलाव अनिवार्य
भारत सरकार ने सभी वाहन निर्माताओं को निर्देश दिया है कि 1 अप्रैल 2025 से वे E20 फ्यूल के अनुकूल इंजन वाले वाहन बनाएं। यह नियम पेट्रोल और हाइब्रिड इंजनों दोनों पर लागू होगा। मारुति सुजुकी, ह्यूंदै, होंडा, किआ, स्कोडा, फोक्सवैगन जैसी कंपनियां पहले ही अपने वाहनों को E20 ईंधन के अनुकूल बना चुकी हैं।
petrol diesel
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भारत की बायोफ्यूल इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत में 500 मिलियन मीट्रिक टन टिकाऊ फीडस्टॉक (कच्चा जैव ईंधन) उपलब्ध है, जिससे बायोफ्यूल सेक्टर तेजी से बढ़ सकता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस) की स्थापना की गई थी। और इसका लगातार विस्तार हो रहा है, जिसमें अब 28 देश और 12 अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस समय भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब है। और अपनी क्षमता को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए काम कर रहा है।
Hyundai Creta Flex Fuel
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क्या है E20 फ्यूल?
E20 फ्यूल का मतलब है 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण। एथेनॉल एक बायोफ्यूल (जैविक ईंधन) है। जिसे गन्ने या मक्का के शुगर को खमीर से फर्मन्टेशन करके बनाया जाता है। इसे पेट्रोकेमिकल प्रक्रिया (एथिलीन हाइड्रेशन) जैसी पेट्रोकेमिकल विधियों के जरिए भी बनाया जा सकता है। एथेनॉल में कुछ संक्षारक (कॉरोसिव) गुण होते हैं, जिससे इसे इस्तेमाल करने के लिए विशेष प्रकार के इंजन और मजबूत कम्पोनेंट्स की जरूरत होती है।
गन्ने की ट्रॉली
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एथेनॉल मिश्रण से भारत को क्या फायदे?
- तेल आयात में कमी: भारत 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से इस निर्भरता को कम किया जा सकता है।
- किसानों की आमदनी बढ़ेगी: एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना और मक्का से बनाया जाता है, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिलेगा।
- पर्यावरण सुरक्षा: एथेनॉल मिश्रण से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन कम होगा, जिससे वायु प्रदूषण घटेगा।
- कम कीमत पर पेट्रोल: अगर पेट्रोल में अधिक एथेनॉल मिलाया जाएगा, तो इसकी लागत कम होगी और आम जनता को सस्ता ईंधन मिल सकेगा।
सरकार आगे चलकर 20 प्रतिशत से ज्यादा एथेनॉल मिश्रण की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है।