सरकार ने पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत बंगलूरू को 4,500, हैदराबाद को 2,000, दिल्ली को 2,800, अहमदाबाद को 1,000 और सूरत को 600 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "हम केवल इलेक्ट्रिक बसें आवंटित नहीं कर रहे हैं - हम नवाचार और पर्यावरण चेतना के साथ भारत की परिवहन प्रणाली के भविष्य को आकार दे रहे हैं। केंद्र और तेलंगाना, कर्नाटक, दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों के बीच घनिष्ठ समन्वय के साथ, हम पीएम ई-ड्राइव वादे को पूरा करने के लिए दृढ़ हैं।"
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कुल योजना क्या है और कितनी सब्सिडी दी जाएगी?
पीएम ई-ड्राइव स्कीम के तहत केंद्र सरकार 4,391 करोड़ रुपये खर्च करके कुल 14,028 इलेक्ट्रिक बसों को सब्सिडी देगी। यह रकम इस योजना की कुल लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होगी। इस आवंटन को वित्त वर्ष 26 तक खर्च किया जाना है। इस योजना का उद्देश्य देश के 9 बड़े शहरों, जिनकी आबादी 40 लाख से ज्यादा है, में इन-सिटी ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देना है। इनमें दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, सूरत और पुणे शामिल हैं।
यह आवंटन - जिसे वित्त वर्ष 26 तक खर्च किया जाना है - का उद्देश्य चार मिलियन से अधिक आबादी वाले नौ शहरों में अंतर-शहर हरित गतिशीलता को बढ़ावा देना है। ये हैं: नई दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, सूरत और पुणे।
राज्यों को उतनी बसें नहीं मिलेंगी, जितनी मांगी थीं
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इलेक्ट्रिक बसों की मांग इतनी ज्यादा थी कि राज्यों को उनकी मांग के मुकाबले कम बसें ही मिलेंगी।
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सरकार कितनी सब्सिडी देती है एक बस पर?
एक इलेक्ट्रिक बस की कीमत करीब 1 करोड़ रुपये होती है। सरकार इसके लिए 20 लाख रुपये से 35 लाख रुपये तक की सब्सिडी देती है, जो बस की लंबाई पर निर्भर करता है:
- 6 से 8 मीटर तक की बस पर - ₹20 लाख
- 8 से 10 मीटर तक की बस पर - ₹25 लाख
- 10 से 12 मीटर तक की बस पर - ₹35 लाख
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सब्सिडी का पेमेंट कैसे होगा?
जब राज्य परिवहन विभाग और बस सप्लायर के बीच समझौता हो जाएगा, तब सब्सिडी की रकम इस तरह दी जाएगी:
- शुरुआत में 20% एडवांस
- ऑपरेशन शुरू होने पर 30%
- सफल 6 महीने पूरे करने पर 25%
- और 18 महीने के बाद बाकी 25%
बसों की खरीद के लिए जल्द शुरू होगा टेंडर प्रोसेस
इन राज्यों को इलेक्ट्रिक बसें देने के बाद, कंवर्जेंस एनर्जी सर्विस लिमिटेड (CESL) नाम की सरकारी एजेंसी एक टेंडर प्रक्रिया चलाएगी। जिसके जरिए राज्यों के परिवहन विभाग ये बसें खरीद सकेंगे।
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इलेक्ट्रिक बसों की बिक्री में गिरावट आई है
हालांकि ये योजना काफी बड़ी है, लेकिन वित्त वर्ष 2025 में देश में इलेक्ट्रिक बसों की बिक्री में 5.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। वित्त वर्ष 24 में जहां 3,516 बसें बिकी थीं, वहीं वित्त वर्ष 25 में सिर्फ 3,314 ही बिक पाईं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 25 में इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी सिर्फ 4.72 प्रतिशत रही, जो कि वित्त वर्ष 22 की 9.34 प्रतिशत हिस्सेदारी के मुकाबले सबसे कम है।
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