भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) ने पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (PM E-DRIVE) योजना में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। स्कीम में नए संशोधनों का मकसद देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के धरेलू निर्माण को बढ़ावा देना है। नए संशोधनों के तहत चरणबद्ध तरीके से सख्त स्थानीयकरण की नीति लागू करने पर जोर दिया गया है, जो इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और बसों सहित विभिन्न श्रेणियों के ईवी के निर्माण पर लागू होंगी।
Solar Car
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ईवी कंपोनेंट्स के लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, ट्रैक्शन बैटरी पैक, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS), व्हीकल कंट्रोल यूनिट (VCU), DC-DC कन्वर्टर्स, ऑनबोर्ड चार्जर्स और ट्रैक्शन मोटर्स जैसे प्रमुख ईवी कंपोनेंट्स को अब देश में ही बनाना आवश्यक होगा। सरकार ने बैटरी मॉड्यूल के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे सेल-टू-सेल कनेक्शन, बस बार फिटमेंट और थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम का एकीकरण भारत में ही किया जाएगा। इसी प्रकार, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम के लिए प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) असेंबली, सेमीकंडक्टर इंटीग्रेशन और फर्मवेयर फ्लैशिंग जैसे घटकों का स्थानीय उत्पादन अनिवार्य किया गया है।
महिद्रा इलेक्ट्रिक कार
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1 मई से प्रभावी होंगे नियम
नए नियम चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे। इलेक्ट्रिक दोपहिया (L1 & L2) और तिपहिया (L5, ई-रिक्शा और ई-कार्ट) वाहनों के लिए संशोधित शर्तें 1 मई, 2025 से प्रभावी होंगी। वहीं, इलेक्ट्रिक बसों (M2/M3) के लिए HVAC सिस्टम, ब्रेक्स के लिए इलेक्ट्रिक कंप्रेसर्स और CCS2 चार्जिंग इनलेट्स जैसे घटकों का स्थानीय निर्माण अधिसूचना की तारीख से छह महीने के भीतर अनिवार्य होगा। कुछ हिस्सों, जैसे बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और DC-DC कन्वर्टर्स के लिए 12 महीने का ट्रांजिशन पीरियड दिया गया है, जिससे इन्हें आयात किया जा सकेगा, लेकिन उसके बाद स्थानीयकरण आवश्यक होगा।
Electric car
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आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयास में, सरकार ने पूरी तरह से नॉक्ड डाउन (CKD) किट्स के एकल विदेशी आपूर्तिकर्ता से आयात पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अतिरिक्त, 'विनिर्माण' की परिभाषा CGST अधिनियम, 2017 के अनुसार होगी, जिससे सभी घरेलू उत्पादन के लिए मानक अनुपालन सुनिश्चित होगा। अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस, इलेक्ट्रिक ट्रक्स और अन्य उभरती ईवी श्रेणियों के लिए अलग दिशानिर्देश बाद में घोषित किए जाएंगे।