नई Tiago की कीमतें (एक्स-शोरूम)
ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने इसकी कीमतें काफी आकर्षक रखी हैं:
| मॉडल |
शुरुआती कीमत (एक्स-शोरूम) |
| Tiago पेट्रोल |
₹4.69 लाख |
| Tiago iCNG |
₹5.79 लाख |
| Tiago EV |
₹6.99 लाख |
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से इंडस्ट्री को चिंता
शैलेश चंद्रा ने बताया कि पिछले 10 दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम 4 बार बढ़ चुके हैं। ऑटो इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
महंगाई का डर: डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई तेजी से बढ़ती है, जिसका सीधा असर ग्राहकों के बजट और उनकी कार खरीदने की सोच पर पड़ता है।
यूज्ड कार मार्केट में सुस्ती: उन्होंने बताया कि यूज्ड (पुरानी) कारों का मार्केट पहले ही सुस्त हो रहा है, जो इस बात का संकेत है कि लोग पैसे बचाने के लिए खर्चों में कटौती कर रहे हैं।
ग्रोथ का अनुमान: इन चिंताओं के बावजूद, चंद्रा ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए पैसेंजर वाहनों की बिक्री में 10% की ग्रोथ का अनुमान बदलना अभी जल्दबाजी होगी। टाटा मोटर्स अपने नए मॉडल्स की बदौलत शानदार डबल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है।
इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) की डिमांड ने पकड़ी रफ्तार
टाटा मोटर्स के लिए सबसे अच्छी खबर इलेक्ट्रिक कारों की बुकिंग से आ रही है। चंद्रा के मुताबिक, पिछले दो महीनों में ईवी की बुकिंग में 2 से 2.5 गुना तक का जबरदस्त उछाल आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेट्रोल के दाम बढ़ने से पहले ही लोग इलेक्ट्रिक कारों की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे थे। ग्राहक अब समझ रहे हैं कि ईवी चलाने का खर्च काफी कम आता है, इसलिए इसकी डिमांड लगातार बढ़ रही है।
टाटा बढ़ाएगी ईवी का उत्पादन
इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए टाटा मोटर्स अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने जा रही है:
उत्पादन में आसानी: चंद्रा ने बताया कि उनके प्लांट में पेट्रोल कार की जगह आसानी से ईवी का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, इसलिए कंपनी के अंदर कोई बड़ी दिक्कत नहीं है।
सप्लायर्स के साथ बातचीत: पार्ट्स सप्लाई करने वाली कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है।
वर्तमान में टाटा मोटर्स हर महीने लगभग 10,000 EVs बना रही है। अगले 3 से 4 महीनों में इस क्षमता को 50% तक बढ़ाने की योजना है। कंपनी का लॉन्ग-टर्म टारगेट इसे 50,000 यूनिट्स प्रति माह तक ले जाने का है।
अंत में, हैचबैक कारों के गिरते मार्केट शेयर पर चंद्रा ने कहा कि पिछले दो वर्षों में गिरावट के बाद अब यह मार्केट कुल इंडस्ट्री के 21-22 प्रतिशत के आसपास स्थिर हो गया है।