एक संसदीय समिति ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार से सब्सिडी बढ़ाने की सिफारिश की है। समिति ने सरकार को FAME-II के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के अपनाने को बढ़ावा देने की तरह, अब निजी इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर्स और 4-व्हीलर्स की खरीद पर सब्सिडी बढ़ाने को कहा है। समिति ने "चाइल्ड पार्ट्स" पर चरणबद्ध तरीके से आयात शुल्क बढ़ाने की भी मांग की है, जब तक कि इन घटकों का स्थानीय रूप से निर्माण नहीं किया जाता है। चाइल्ड पार्ट्स वे छोटे हिस्से होते हैं जो महत्वपूर्ण हिस्सों को बनाने के लिए एक साथ इकट्ठे किए जाते हैं। समिति ने कहा है कि इसका ध्यान रखा जाना चाहिए कि इनमें से कुछ सामान अभी भी चीन सहित कई देशों से आयात किए जाते हैं।
HEV पर कम हो टैक्स
Electric Car
- फोटो : For Reference Only
पैनल ने हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों (HEV) पर जीएसटी दरों को कम करने का भी सुझाव दिया है। इसने इस बात पर भी ध्यान दिया कि कैसे इस समय इलेक्ट्रिक कारों पर 5 प्रतिशत टैक्स लगाया जाता है और बड़े HEV पर 43 प्रतिशत (28 प्रतिशत जीएसटी प्लस 15 प्रतिशत सेस) लगाया जाता है।
HEV करते हैं ऊर्जा की बचत
Electric Car
- फोटो : iStock
उद्योग पर संसदीय स्थायी समिति ने कहा, "इंटरनल कंब्शन इंजन (आईसीई) की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहन ऊर्जा खपत को 75 प्रतिशत तक कम कर देते हैं, जबकि हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (HEV) बिना किसी बाहरी चार्जर के आईसीई के मुकाबले ऊर्जा खपत को 30 से 45 प्रतिशत तक कम कर देते हैं। इसलिए, ईवी के ही तरह एचईवी भी जीएसटी दर के मामले में छूट के हकदार हैं। एचईवी का जीएसटी समर्थन पूरे इकोसिस्टम की मदद करेगा और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाए जाने की रफ्तार बढ़ाएगा।"
"एक भारत, एक नीति" की सिफारिश
Electric Car
- फोटो : iStock
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए भारत को "मिड-टर्म कोर्स करेक्शन", ईवी उद्योग के लिए "एक भारत, एक नीति" और "इसकी भागीदारी को बढ़ाने" के लिए एक केंद्रित रणनीति के जरिए ईवी ट्रांसिशन का समर्थन करने के लिए सब्सिडी और वित्तपोषण करने की जरूरत है।
आयात पर रखें नजर
EV Charging Stations
- फोटो : iStock
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रमुख कलपुर्जों के स्थानीयकरण में काफी प्रगति के बावजूद, वाहन निर्माता अभी भी चीन जैसे अन्य देशों से कुछ चाइल्ड पार्ट्स आयात कर रहे है।